डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर एलपीजी (डीबीटीएल) योजना के तहत 78 प्रतिशत ग्राहकों को अगले माह से सब्सिडी मिलनी शुरू हो जाएगी। मगर, जिले के 22 प्रतिशत ग्राहक ऐसे हैं, जो गैस एजेंसी और बैंक के बीच पिस रहे हैं। इनमें से अधिकांश ने गैस एजेंसियों पर तो फीडिंग करा दी है, मगर बैंकों की लापरवाही के चलते फीडिंग नहीं हो पा रही है।
जिले में लगभग 78 प्रतिशत ग्राहक आनलाइन हो गए हैं, जबकि 22 प्रतिशत ग्राहक एजेंसी और बैंकों के बीच चक्कर लगा रहे हैं।
उपभोक्ताओं के बैंक खाते को गैस कनेक्शन नंबर और आधार कार्ड से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए आधार कार्ड धारक उपभोक्ताओं को फार्म नंबर एक और दो भरने हैं, वहीं बिना आधार कार्ड वाले उपभोक्ताओं को फार्म नंबर चार भरना है। इंडियन ऑयल के एरिया मैनेजर (सेल्स) प्रभात सिंह ने बताया कि उपभोक्ताओं को डीबीटीएल के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जो उपभोक्ता सब्सिडी नहीं चाहते या गैस कनेक्शन किसी अन्य के नाम है, उनके पास न तो आईडी और न कनेक्शन है। उन्हें भी फार्म नंबर पांच भरना होगा। अगर समय रहते फार्म नहीं भरा तो गैस कनेक्शन से हाथ धोना पड़ेगा।
अगर आपके पास किसी अन्य का गैस कनेक्शन है। मगर कनेक्शन के मूल कागज आपके ही पास है तो उस कनेक्शन को आप अपने नाम करा सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ता को एक सिलेंडर वाले गैस कनेक्शन पर 1600 रुपये सिक्योरिटी और दो सिलेंडर पर 3050 रुपये जमा करने होंगे। इस सिक्योरिटी में वह धनराशि काट दी जाएगी, जो पूर्व में इस कनेक्शन पर सिक्योरिटी के रूप में जमा है। उपभोक्ता को अपना पहचान पत्र, बैंक खाता नंबर और कनेक्शन के मूल दस्तावेज जमा कराकर केवाईसी फार्म भरना होगा। पति और पत्नी ने अगर अलग-अलग गैस कनेक्शन लिया है तो एक को बंद करना होगा। पति-पत्नी अलग-अलग कनेक्शन अब नहीं ले सकेंगे। ऐसे सभी गैस कनेक्शन बंद किए जाएंगे।