लॉकडाउन के चलते प्रयागराज व लखनऊ में इलाज करा रहे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले की सीमा बंद होने से अब न तो वह डॉक्टर को दिखा पा रहे हैं और न ही दवा ला पा रहे हैं। इनमें कई मरीज ऐसे भी हैं जिन्हें हर दिन दवा लेना जरूरी है। दवाएं न मिल पाने के कारण मरीजों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। तीमारदार तहसीलों में वाहन पास के लिए चक्कर लगा रहे हैं। काफी मशक्कत के बाद लोगों को किसी तरह पास मिल पा रहा है।
जिले में न्यूरो, हार्ट, नाक-कान, गला और कैंसर के साथ कई अन्य घातक बीमारियों से जूझ रहे लोगों का प्रयागराज और लखनऊ में इलाज चल रहा है। उन्हें हर पांच-दस दिन पर चिकित्सकों से संपर्क करना पड़ता है। दरअसल, जिले में गंभीर मर्ज के न डाक्टर हैं और न ही दवाएं मिल पाती हैं। कोरोना से बचाव के लिए लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद ऐसे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। जिले की सीमाएं सील हैं। किसी के भी बाहर आने-जाने पर रोक है। ट्रेनों के साथ ही बसों के संचालन पर रोक लगी है।
ऐसे में जिन मरीजों का इलाज प्रयागराज-लखनऊ और दिल्ली के साथ मुंबई में चल रहा था उनकी परेशानी बढ़ गई है। न उनकी दवाएं मिल पा रही हैं और नही डाक्टरों से संपर्क हो पा रहा है। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं। मरीजों के तीमारदार पास बनवाने क लिए एसडीएम के पास चक्कर लगा रहे हैं। कोरोना वायरस के चलते जिले के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा बंद हो गई है। प्राइवेट अस्पताल के चिकित्सक सिर्फ इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भर्ती कर इलाज कर रहे हैं। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं।