जैसलमेर से हावड़ा जा रही जैसलमेर एक्सप्रेस शुक्रवार को 13 घंटे की देरी से प्रतापगढ़ पहुंची। ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचते ही यात्रियों ने हंगामा खड़ा कर दिया। सिग्नल मिलने के बाद भी यात्री चेनपुलिंग कर ट्रेन को रोक दे रहे थे। उनका आरोप था कि रास्ते में ट्रेन को जानबूझकर लेट किया गया। ट्रेन को खड़ा कराकर मालगाडिय़ां निकाली जाती रहीं। पैंट्रीकार न होने से यात्री भूख-प्यास से बेहाल हो गए। मामले की जानकारी होने के बाद मौके पर पहुंचे अफसरों ने किसी तरह यात्रियों को समझाकर ट्रेने आगे के लिए रवाना की।
जैसलमेर से हावड़ा जाने वाली गाड़ी संख्या 12372 के प्रतापगढ़ पहुंचने का समय गुरुवार रात ढाई बजे है, मगर यह ट्रेन 13 घंटे की देरी से शुक्रवार शाम 3.10 पर स्टेशन पहुंची। 13 घंटे लेट होने के कारण यात्री परेशान थे। कोच के शौचालयों में पानी खत्म हो गया था। पैंट्रीकार न होने से यात्री भूख-प्यास से बेहाल हो गए। प्रतापगढ़ में जैसे ही ट्रेन खड़ी हुई यात्री प्लेटफार्म पर आ गए। वे हंगामा करते हुए स्टेशन अधीक्षक के चैंबर में पहुंच गए। इस बीच सिग्नल देकर को ट्रेन को आगे रवाना करने का प्रयास किया गया, लेकिन यात्री बार-बार चेन पुलिंग कर ट्रेन रोक दे रहे थे। यात्री रेल प्रशासन मुर्दाबाद का नारा लगाते रहे। स्टेशन अधीक्षक त्रिभुवन मिश्र, जीआरपी एसओ वीके सिंह, मजदूर यूनियन के उपाध्यक्ष प्रदीप शर्मा, लोकोलाबी इंचार्ज एमबी सिंह, आरपीएफ एसओ व सीआईटी सीएन पांडेय ने यात्रियों को किसी तरह समझाकर शांत कराया। उनके नाश्ता और खाना की व्यवस्था कराई। ट्रेन के शौचालयों को साफ कराया और पानी भरवाया। तब जाकर ट्रेन आगे के लिए रवाना की गई।
लखनऊ में जैसे ही ट्रेन पहुंची कि कुछ यात्रियों ने लेटलतीफी के बारे में डीआरएम सतीश कुमार को जानकारी दी। डीआरएम ने यात्रियों को आश्वासन दिया था कि ट्रेन अब ज्यादा देर के लिए नहीं रोकी जाएगी। इस पर यात्री मान गए थे। मगर लखनऊ से चलने के बाद प्रतापगढ़ पहुंचने में ट्रेन को सात घंटे का समय लग गया। इससे यात्री भड़क गए। उध्ार दिल्ली से चलकर प्रतापगढ़ को आने वाली पद्मावत एक्सप्रेस शुक्रवार को सात घंटे की स्त्रत्त्देरी से पहुंची, वहीं अमृतसर-हावड़ा सात घंटे लेट रही। लखनऊ-प्रयाग पीआरएल पैसेंजर अनिश्चितकालीन लेट बताई जा रही थी।