प्रधानी के चुनाव के पहले ग्रामपंचायतों की तिजोरी खाली करने का अभियान इन दिनों तेज हो गया है। जिला स्तरीय अधिकारियों के चुनाव में व्यस्त होने का लाभ उठाते हुए प्रधान और सचिव मलाई काट रहे हैं। कागज पर हो रहे विकास की शिकायत गांव के लोगों के करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
जिले में ग्राम प्रधान पद के लिए होने वाले चुनाव की अधिसूचना के लिए सात नवंबर की तिथि प्रस्तावित है। चुनाव आयोग ने जो तैयारी की है, उसके मुताबिक 10 दिसंबर तक परिणाम भी आ जाएगा। नई आरक्षण नीति से कई प्रधानों के दोबारा चुने जाने का सपना चूर हो चुका है, तो कुछ के गबन के आरोप में फंसने से उनकी छवि खराब हो चुकी है। ऐसे में दोबारा प्रधानी मिलेगी की नहीं, इस बात से संशय में रहने वाले प्रधानों की नजर ग्रामपंचायत कीतिजोरी पर है। बैंकों में विकास के लिए आने वाली धनराशि को प्रधान और ग्रामपंचायत अधिकारियों की मिलीभगत से बंदरबांट किया जा रहा है। कागजों पर हो रहे विकास कार्य के लिए बिल, वाउचर भी तैयार किया जा रहा है।
प्रधानों के इस खेल की शिकायत प्रधान पद के प्रत्याशी अफसरों से कर रहे हैं, मगर चुनाव में व्यस्त होने के कारण अफसर उन पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे प्रधान और ग्रामपंचायत अधिकारी मनमानी पर उतर आए हैं। डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव ने बताया कि प्रधानों के खिलाफ शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि हम यह नहीं कहते हैं कि सभी शिकायतें झूठी हैं, मगर चुनाव की व्यस्तता के चलते जांच करने का मौका नहीं मिल रहा है। ग्राम पंचायत अधिकारियों को पत्र जारी कर कहा गया है कि जो विकास कार्य हो रहे हैं, उसी का भुगतान किया जाए।