प्रधानी के चुनाव में पहली बार 150 अधिक प्रधानों का चुनाव गांव की जनता करेगी। नए परिसीमन में इन ग्राम पंचायतों का गठन किया गया है। पहली बार गठित ग्राम पंचायतें अनारक्षित होने के कारण सभी जाति वर्ग के लोगों को प्रधानी में किस्मत आजमाने का मौका मिलेगा। कुंडा ब्लाक में सबसे अधिक और पट्टी में सबसे कम नई ग्राम पंचायतों का सृजन किया गया है।
जिला पंचायत सदस्य और ग्राम पंचायत सदस्य पद का परिणाम घोषित होने के बाद अब गांवों में प्रधानी को लेकर प्रत्याशियों ने कमर कसनी शुरू कर दी है। वर्ष 2010 हुए प्रधानी के चुनाव से इस वर्ष 150 अधिक प्रधान के पद सृजित किए गए हैं। इन प्रधानों की यह संख्या परिसीमन में उभर कर आई है। जिले के 171 न्याय पंचायतों में कुल 1105 ग्राम पंचायतें थीं। मगर बीते वर्ष हुए परिसीमन में यह संख्या बढ़कर 1255 पहुंच गई है। नवसृजित ग्राम पंचायतों को अनारक्षित रखा गया है। इसलिए इन गांवों में सभी जाति वर्ग के लोगों को प्रधानी के चुनाव में जोर आजमाइश करने का मौका मिलेगा।
हालांकि नई ग्राम पंचायत सृजित कराने वाले लोग गांव के जनता से इसका श्रेय लेते नहीं थक रहे हैं। वह चुनाव में इसी को मुद्दा बनाकर जनता से वोट मांग रहे हैं। ग्राम प्रधान का चुनाव कार्यक्रम सात नवंबर को घोषित होने वाला है। चुनाव को लेकर गांव की राजनीति गरमा गई है। इधर जिला प्रशासन भी तैयारी करने में जुटा हुआ है। डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव ने बताया कि वर्ष 2010 में 1105 प्रधानों का चुनाव हुआ था, मगर 2015 के चुनाव में 1255 प्रधान चुने जाएंगे।