प्रधानी के चुनाव के लिए आरक्षण प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंचते ही अफसरों को नेताओं की घुड़की मिलने लगी है। नेता अपने चहेते प्रधानों की कुर्सी बचाने के लिए हर स्तर पर दबाव बना रहे हैं। नेताओं की घुड़की से अफसर सहमे हुए हैं। पशोपेश में फंसे अधिकारी बचाव का रास्ता खोज रहे हैं।
जिले की 1255 ग्राम पंचायतों को आरक्षित करने की कवायद अंतिम दौर में है। डीपीआरओ का कहना है कि 28 सितंबर को आरक्षण सूची जारी कर आम लोगों से आपत्तियां ली जाएंगी। अगर किसी की शिकायत जायज होगी तो विचार करके आठ अक्तूबर को संशोधित सूची जारी कर दी जाएगी। आरक्षण की कवायद अंतिम दौर में होने के चलते नेता अधिकारियों को फोन कर अपने चहेते प्रधानों की कुर्सी बचाने में जुट गए हैं। यही नहीं, दिन-रात नेताओं की खुशामद करने वाले प्रधानों की सीट बचाने के लिए नेता अधिकारियों से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं।
आलम यह है कि आरक्षण कार्य में लगे अफसरों को जिले के प्रभावशाली नेेता फोन कर अपने चहेतों प्रधानों की ग्राम पंचायतों को नोट कराकर मनमुताबिक आरक्षण के लिए दबाव बना रहे हैं। ऐसा नहीं करने वाले अफसरों को चुनाव के बाद देख लेने की धमकी भी दी जा रही है। हां में हां मिलाने वाले अफसर इस पशोपेश में फंसे हुए हैं कि एक तरफ तो शासन की गाइड लाइन और दूसरी ओर शीर्ष अधिकारियों का भय। ऐसे में अफसर कोई भी निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव ने इस बात से इनकार करते हुए कहा कि किसी का भी दबाव काम नहीं आएगा। शासन की गाइड लाइन के तहत ग्राम पंचायतें आरक्षित की जा रही हैं।