राजस्व कर्मचारियों ने अपने करीबियों को एक-एक हजार रुपये और राशन किट मुहैया कराने के लिए बड़ा खेल कर दिया। गांवों में रहने वाले लोगों को ही प्रवासी कामगार बना दिया गया। कुंडा तहसील में हुए खेल की जानकारी होते ही डीएम ने जांच कराई। जिसमें खुलासा हुआ है कि 4182 नाम फर्जी हैं। हालांकि, इन नामों को गायब कर दिया गया है, मगर अभी तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है।
गुजरात, दिल्ली, मुंबई से आने वाले प्रवासी मजदूरों को राहत देने के लिए योगी सरकार ने एक-एक हजार रुपये और एक-एक राशन किट देेने का निर्देश दिया था। जो लोग ट्रेन और बस से आ रहे थे, उन्हें जिला प्रशासन राशन किट मुहैया करा रहा था। सीधे गांव पहुंचने वाले लोगों की सूची राजस्व विभाग से लेकर प्रवासी मजदूरों को बुलाकर राशन किट वितरित किया जा रहा था।
कुंडा तहसील में प्रवासी मजदूरों की सूची फीड करने में राजस्व कर्मचारियों का बड़ा खेल उजागर हुआ है। शिकायत के बाद जांच में मामला सही मिलने पर राजस्व विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बजाय आवेदकों और कंप्यूटर आपरेटरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। मामला डीएम के संज्ञान में आने पर तहसील में तैयार सूची की जांच कराने पर खुलासा हुआ कि 4182 आवेदकों के नाम फर्जी हैं। यह लोग गांव के ही हैं और लाभ पहुंचाने के लिए इनका नाम शामिल कर दिया गया है। अब इन लोगों को सूची से बाहर कर दिया गया है, मगर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रवासी मजदूरों की सूची के सत्यापन में जो नाम गलत फीड हुए थे, उन्हें बाहर कर दिया गया है। जल्द ही जिम्मेदार लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
जलराजन चौधरी, एसडीएम, कुंडा