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जिला अस्पताल में ऑक्सीजन के लिए हाहाकार, तड़प रहे मरीज

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जिला अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए बाहर से सिलेन्डर लेकर वार्ड में जाता युवक। - फोटो : PRATAPGARH
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प्रतापगढ़। जिला अस्पताल में शुक्रवार की रात प्लांट में खराबी के चलते ऑक्सीजन की सप्लाई ठप होने से हाहाकार मचा रहा। ऑक्सीजन के लिए मरीज तड़पते रहे। मरीजों के तीमारदार परेशान होकर महंगे दामों पर बाहर से ऑक्सीजन सिलिंडर लाते रहे। शनिवार को आक्सीजन प्लांट ठीक करने के लिए लखनऊ से इंजीनियर पहुंचा, मगर देर शाम तक खराबी दूर नहीं हो सकी। रेडिएटर के खराब पार्ट्स को लखनऊ व कानपुर से मंगाया गया है। प्लांट से ऑक्सीजन सप्लाई में एक-दो दिन का समय लग सकता है।
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जिला अस्पताल में सांस की तकलीफ से संबंधित करीब पचास मरीज भर्ती हैं। इनमे से अधिकांश मरीजों को ऑक्सीजन लगा है। शुक्रवार की शाम ऑक्सीजन प्लांट का रेडिएटर जल गया। प्लांट ठप होते ही वार्डों में ऑक्सीजन की सप्लाई ठप हो गई। जिसके चलते अस्पताल में भर्ती मरीज तड़पने लगे। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने सिलिंडर व ऑक्सीजन कानसेंट्रेटर मशीन के जरिए मरीजों को आक्सीजन देना शुरू किया।, लेकिन यह नाकाफी रहा। रात में करीब 27 ऐसे नए मरीज अस्पताल में पहुंचे, जिनका ऑक्सीजन लेवल 40 के आसपास था। सभी को आक्सीजन मुहैया कराना अस्पताल प्रशासन के बस की बात नहीं थी।ऑक्सीजन के लिए तड़प रहे मरीजों की तकलीफ परिजन बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। इस बीच डाक्टर की सलाह पर मरीजों के तीमारदार बाहर से ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदकर लाने लगे। कुछ मरीजों को ऑक्सीजन हटाकर गंभीर मरीजों को लगाया गया।
शहर के गायत्री नगर की रहने वाली सरिता के परिजन रात में छोटा आक्सीजन का सिलिंडर कहीं से पांच हजार रुपये में खरीदकर ले आए। इसी तरह मानधाता के रहने वाले राजकुमार को भी सांस लेने में तकलीफ के चलते जिला अस्पताल लाया गया। उनका ऑक्सीजन लेवल 38 के करीब था। अस्पताल में व्यवस्था न देख परिजन उन्हें लेकर प्राइवेट अस्पताल चले गए। शनिवार को भी जिला अस्पताल में आने वाले सांस की तकलीफ के मरीजों को आक्सीजन के लिए परेशान होना पड़ा। इमरजेंसी से मेडिकल वार्ड तक ऑक्सीजन सिलिंडर की किल्लत से मरीज तड़पते रहे। स्वास्थ्य कर्मचारी थोड़ी-थोड़ी देर में सिलिंडर बदलकर उनका जीवन बचाने के लिए प्रयास करते रहे। दूसरी ओर आक्सीजन प्लांट ठीक करने के लिए लखनऊ से कंपनी का इंजीनियर पहुंचा। हालांकि काफी प्रयास के बाद भी देर शाम तक खराबी दूर नहीं हो सकी। शाम को रेडिएटर के पार्ट्स मंगाने के लिए कर्मचारियों को लखनऊ और कानपुर रवाना किया गया।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डा. पीपी पांडेय ने बताया कि प्लांट के खराब पार्ट्स को मंगाने के लिए कर्मचारियों को लखनऊ व कानपुर भेजा गया है। चूंकि वहां भी लॉकडाउन है। अधिकारियों से बात की जा रही है, जिससे किसी तरह पार्ट्स उपलब्ध हो सकें। यदि पार्ट्स मिल जाते हैं तो रविवार तक प्लांट काम करने लगेगा। अन्यथा कुछ समय और लग सकता है। अस्पताल में उपलब्ध ऑक्सीजन सिलिंडरों के जरिए किसी तरह काम चलाया जा रहा है। कुछ तीमारदार अपने मरीजों के इलाज के लिए बाहर से भी ऑक्सीजन सिलिंडर ला रहे हैं।
जिला अस्पताल में ऑक्सीजन के सिर्फ तीस सिलिंडर
सीएमएस डा. पीपी पांडेय ने बताया कि जिला अस्पताल में 10 बड़े व 20 छोटे सिलिंडर ही उपलब्ध हैं। वहीं 25 ऑक्सीजन कानसेंट्रेटर मशीन भी अस्पताल के पास है। जिससे मरीजों को ऑक्सीजनउपलब्ध कराया जा रहा है।
अभद्रता पर उतरे स्वास्थ्यकर्मी
शहर के अजीत नगर वार्ड की रहने वाली शकुंतला खरे को शुक्रवार की रात सांस लेने में दिक्कत हुई। हालांकि उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव थी। इमरजेंसी में देखने के बाद डाक्टरों ने उन्हें मेडिकल वार्ड में भर्ती कर लिया। पहले आक्सीजन लगाने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारी तैयार नहीं हुए। परिजनों के दबाव बनाने पर अभद्रता पर उतारू हो गए। नौबत मारपीट तक पहुंच गई। बाद में कुछ लोगों के हस्तक्षेप पर ऑक्सीजन लगाया। इसे लेकर अस्पताल में काफी देर तक हंगामा होता रहा। शकुंतला के दामाद सुजीत खरे का आरोप है कि अस्पताल में ऑक्सीजन के लिए मरीजों को तड़पना पड़ रहा है।
समय पर ऑक्सीजन न मिलने से चली गई महिला की जान
सांस लेने में दिक्कत के चलते एक 40 वर्षीय महिला को शनिवार की सुबह जिला अस्पताल लाया गया। प्राथमिक उपचार करने के बाद डाक्टरों ने महिला को मेडिकल वार्ड में शिफ्ट कर दिया। परिजन उसे आक्सीजन लगाने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों से अनुनय-विनय करते रहे। इस दौरान काफी समय बीत गया। बाद में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने महिला को आक्सीजन लगाया गया, लेकिन पांच मिनट बाद उसकी सांसें थम गईं। यह देख परिजन बिलखने लगे।
सीएमओ को अब आई जिला अस्पताल की याद, पहुंचे मेडिकल वार्ड
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में लगातार हो रहीं मौतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के मुखिया डा. अरविंद श्रीवास्तव को कोई चिंता नहीं है। शुक्रवार से ऑक्सीजन प्लांट में आई खराबी व मरीजों को आ रही दिक्कतों को देखते हुए शासन से लेकर जिलाधिकारी व सीडीओ ने सीएमओ के रवैए पर नाराजगी जताई। अधिकारियों की नाराजगी देख शनिवार को सीएमओ जिला अस्पताल पहुंचे। सीएमएस को साथ लेकर मेडिकल वार्ड पहुंचे। ऑक्सीजन प्लांट की खराबी की जानकारी ली। परिसर में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। इस दौरान मरीजों के परिजन उन्हें अपनी परेशानी बताने लगे। इस पर वह झुंझलाकर आगे बढ़ गए।
मरीजों को आक्सीजन देने की व्यवस्था रामभरोसे
जिला अस्पताल व कोविड एलटू में मरीजों को आक्सीजन देने की व्यवस्था रामभरोसे है। बिना आपरेटर के मरीजों को स्वास्थ्य कर्मचारी ऑक्सीजन लगाते हैं। सिलिंडर या फिर प्लांट से आक्सीजन की सप्लाई की जाती है। जिला अस्पताल व कोविड एलटू वार्ड में भर्ती मरीजों को कितनी मात्रा में आक्सीजन देनी है, इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को नहीं होती। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि मनमाने ढ़ग से ऑक्सीजनदी जाती है। पुराने सांस के मरीजों को हर मिनट करीब दो लीटर ऑक्सीजन की जरूरत होती है। हृदय के रोगियों को हर मिनट में पांच लीटर और 40 से कम ऑक्सीजन लेवल के मरीजों को पांच लीटर देनी होती है। मगर अस्पताल में लापरवाही बरती जा रही है। किसी को कम तो किसी को अधिक मात्रा में आक्सीजन की सप्लाई दी जा रही है। मरीजों को मानक के विपरीत ऑक्सीजन की सप्लाई होने की बात सामने आ रही है।
36 सौ का सिलंडिर मिल रहा 12 हजार में
मौजूदा समय में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ है। हर घंटे जिला अस्पताल में ऐसे दो से तीन मरीज पहुंच रहे हैं। बहुत से मरीज प्राइवेट अस्पतालों और घरों में अपना उपचार कर रहे हैं। अस्पताल के बाहर से लोग ऑक्सीजन का सिलिंडर खरीदकर ला रहे हैं। पल्टन बाजार में ऑक्सीजन सिलिंडर का कारोबार करने वाले आदिल के अनुसार बाहर से ऑक्सीजन सिलिंडर कम मिल रहे हैं। सिलिंडर के लिए अधिक कीमत देनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि जो सिलिंडर अभी तक 36 सौ रुपये में आसानी से मिल जाता था, उसके लिए अब 12 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। पहले जो छोटा सिलिंडर 250 रुपये में मिलता था, उसके लिए एक से दो हजार रुपये देने पड़ रहे हैं। ऑक्सीजन की खपत के बीच सिलिंडर की कालाबाजारी जारी है। इस पर किसी की नजर नहीं पड़ रही है।

जिला अस्पताल में खराब हुए आक्सीजन प्लांट को बनाते मकैनिक।- फोटो : PRATAPGARH

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