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शौचालय बनाने नहीं बल्कि प्रयोग करने पर जोर

Thu, 14 Apr 2016 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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जिले में इन दिनों शौचालय बनाने के लिए अधिकारी आर्थिक मदद देने के बजाय उसके प्रयोग करने पर जोर दे रहे हैं। ऐेसे में सवाल यह है कि जब गांव के लोगों के पास शौचालय होगा ही नहीं तो वे प्रयोग कैसे करेंगे। अफसरों ने एक माह के अंदर जिले के सोलह गांवों को खुले में शौच से मुक्त गांव बनाने का संकल्प लिया है, मगर इसे पूरा करना आसान भी नहीं होगा।
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जिले के अफसर इन दिनों गांव-गांव का भ्रमणकर खुले में शौच नहीं जाने और शौचालय का प्रयोग करने पर जोर दे रहे हैं। अधिकारियों ने यह मुहिम ऐसी दशा में चलाई है जब जिले का कोई भी विकास खंड और कोई गांव शौचालय से संतृप्त नहीं किया गया है। इसके बावजूद अफसर गांव के लोगों से शौचालय का प्रयोग करने पर जोर दे रहे हैं। अफसर इस मुहिम के आगे शौचालय बनाने के लिए ग्राम पंचायत और विभाग से मिलने वाली आर्थिक मदद की चर्चा करना ही भूल गए हैं।

जब गांव का कोई गरीब व्यक्ति अफसरों से शौचालय बनाने में असमर्थता व्यक्त करता है तो अधिकारियों की तरफ से मिलने वाले उत्तर से उसका मुंह लटक जाता है। सदर ब्लाक के सरायदली गांव निवासी शिवबाबू की मानें तो अफसरों के सामने पहुंचना पसंद नहीं कर रहे हैं। जिले के अफसरों ने 16 गांवों का चयन कर अप्रैल माह में खुले में शौच से मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए अफसर भोर में ही गांव पहुंच रहे हैं। यह अभियान कितना सफल होगा, यह तो समय बताएगा, मगर इतना तो तय है कि अफसरों की हलचल से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव का मानना है कि अगर किसी को शौचालय बनवाना है तो वह विभाग से आर्थिक सहयोग मिलने का इंतजार नहीं करेगा। यह तो सिर्फ एक बहाना है। उन्होंने बताया कि जब से अभियान प्रारंभ हुआ है तब से काफी लोगों ने अपने घरों में शौचालय बनाने का कार्य प्रारंभ कर दिया है।
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