जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भारत संचार निगम लिमिटेड के जिला प्रबंधक को परिवादी का बकाया बिल माफ करने का आदेश दिया। साथ ही आयोग ने मानसिक-आर्थिक कष्ट एवं वाद व्यय के रूप में निर्णय की तिथि के एक माह के भीतर 10 हजार रुपये अदा करने का आदेश दिया।
शहर के आवास विकास कॉलोनी निवासी उमेश पांडेय ने 17 अक्तूबर 2014 को आयोग के समक्ष परिवाद दायर किया। जिसमें उन्होंने बताया कि इंटरनेट के लिए 19 अगस्त 2009 को बीएसएनएल का ब्राडबैंड कनेक्शन लिया था। छह जनवरी 2011 को उन्होंने 499 रुपये का इंटरनेट प्लान लिया। 19 अगस्त 2011 प्लान बदलकर 500 रुपये का कर दिया गया। जोकि रात में दो से सुबह आठ बजे तक ही अनलिमिटेड प्लान की सुविधा देता था।
शेष समय के लिए 1.5 जीबी का सीमित प्लान ही दिया गया। बार-बार प्लान बदलने के कारण बिल अधिक आया। जिसकी कोई जानकारी भी विभाग ने नहीं दी। उन्हाेंने आयोग से बिल संशोधित और मानसिक कष्ट व वाद व्यय दिलाने की मांग की। जिस पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग अध्यक्ष यशवंत कुमार मिश्र, सदस्य सहसराम, महिला सदस्य ममता गुप्ता ने बीएसएनएल के जिला प्रबंधक को बिल माफ करने एवं एक महीने के भीतर मानसिक कष्ट व वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये चुकाने का आदेश दिया।