प्रतापगढ़/कोहड़ौर/किशुनगंज/रानीगंज। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के बीच शासन ने बीस अप्रैल के बाद सरकारी अस्पतालों में ओपीडी शुरू करने का निर्देश दिया था, लेकिन जिले के ज्यादातर अस्पतालों में यह सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। ओपीडी में ताला लगाकर चिकित्सक गायब हैं। सीएमओ को इतनी फुर्सत नहीं है कि वे सीएचसी और पीएचसी का औचक निरीक्षण कर सकें।
महामारी कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए देशभर में तीन मई तक लॉकडाउन है। इस बीच सरकारी के साथ प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी सेवा शुरू करने का आदेश प्रदेश सरकार ने दिया था। हैरत की बात तो यह है कि सीएमओ ने हॉटस्पॉट इलाके में स्थित जिला व महिला अस्पताल में ओपीडी का संचालन शुरू करा दिया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थित सीएचसी और पीएचसी की ओर उनका ध्यान नहीं पड़ रहा है। लॉकडाउन होने के कारण मरीज नजदीकी सीएचसी और पीएचसी पर इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं तो ओपीडी गेट पर ताला लटकता दिखाई पड़ रहा है। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
कोहड़ौर सीएचसी में गुरुवार दोपहर 12 बजे ओपीडी गेट पर ताला लटक रहा था। इमरजेंसी से लेकर ओपीडी और पैथालॉजी तक एक भी स्वास्थ्य कर्मचारी नहीं दिखाई पड़े। यही हालत रानीगंज सीएचसी की थी। यहां पर ओपीडी बंद थी। यहां तैनात चिकित्सकों की ड्यूटी नरसिंहगढ़ में लगा दी गई है। सीएचओ को कंट्रोलरूम में बैठा दिया गया है। लेबर रूम में आने वाली प्रसव पीड़िताओं को भर्ती करने से लेकर प्रसव कराने की जिम्मेदारी स्टाफ नर्स उठा रही हैं। ओपीडी में न तो चिकित्सक हैं और न ही दवा के नाम पर पैरासीटामॉल है। इसी तरह मानधाता, विश्वनाथगंज, सड़वाचंद्रिका, सीएचसी मंदाह, सीएचसी गड़वारा, पीएचसी दुर्गागंज समेत अन्य सरकारी अस्पतालों का भी यही हाल है। शासन के आदेश के बाद भी ओपीडी में ताला लटकता दिखाई पड़ रहा है।
शासन की ओर से ओपीडी खोलने का आदेश आ गया है। सभी अधीक्षकों को बता दिया गया है। इसके बाद भी यदि ओपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज नहीं करते हैं तो गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी।
डॉक्टर एसके सिंह, डिप्टी सीएमओ।
जेडी को प्रतापगढ़ का नोडल बनाया गया है। वे प्रतिदिन वहीं रहते हैं। यदि अस्पतालों में अभी तक ओपीडी क्रियाशील नहीं हुई है तो जांच करवा कर अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ से लिखित में जवाब मांगा जाएगा।
डॉक्टर सुधाकर पांडेय, एडी स्वास्थ्य।