प्रदेश सरकार की ओर से निजी स्कूलों में शुल्क नियंत्रण के लिए लागू कानून की खामियों का लाभ उठाते हुए फिर से निजी स्कूल संचालकों ने मनमानी शुरू कर दी है। 2018 में निजी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने के लिए कानून लागू किया गया था, मगर इसका असर कहीं नहीं दिख रहा है। नए शिक्षा सत्र में शहर के अधिकांश स्कूलों में प्रति महीने 500 से एक हजार रुपये तक के शुल्क की बढ़ोतरी की गई है। एडमिशन फीस के नाम पर भी दस से 12 हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं। स्कूल संचालक यह शुल्क किस मद में ले रहे हैं, उनकी फीस रसीद में इसका विवरण नहीं है।
जिले के कान्वेंट स्कूलों ने यूपी सरकार के अधिनियम को ठेंगा दिखाते हुए नए शिक्षासत्र में मनमाने ढंग से शुल्क बढ़ा दिया है। एक साल के अंदर अंग्रेजी स्कूलों की फीस डेढ़ गुना बढ़ गई है। ड्रेस, कापी-किताब के दामों में जबरदस्त इजाफा करके अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। हद तो यह हो गई है कि स्कूल संचालकों ने ड्रेस और कॉपी-किताब के लिए दुकानों से सेटिंग कर कमीशन तय कर रखा है।
अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। किताब, ड्रेस, जूता, मोजा सब कुछ बदल कर अभिभावकों को नया लेने के लिए विवश किया जा रहा है। दाखिला के नाम पर प्ले ग्रुप से कक्षा तीन के बच्चों से दस हजार और कक्षा तीन से आठ तक के बच्चों से 15 से 20 हजार रुपये ऐंठे जा रहे हैं। तय दुकानों पर मिलने वाली किताबों के लिए भी मनमाने ढंग से वसूली हो रही है।
दुकानों पर किताबों का बंडल और भुगतान की स्लिप पहले से ही रखी गई है। अभिभावकों के पहुंचते ही थमा दिया जा रहा है। कॉपी और किताब से प्रिंट दाम से एक रुपये भी कम नहीं लिया जा रहा है। प्ले ग्रुप और केजी के बच्चों के लिए तीन-तीन हजार रुपये की किताबें दी जा रही हैं।
निजी स्कूलों संचालकों की मनमानी की जांच कराई जाएगी। शासन के निर्देशों को न मानकर मनमाना शुल्क लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।
मार्कण्डेय शाही, डीएम।