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डेढ़ हजार नवजात नहीं कर सके स्तनपान

Sat, 04 Jul 2015 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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प्रतापगढ़। जन्म लेने के बाद एक घंटे के अंदर करीब डेढ़ हजार नवजात स्तनपान नहीं कर सके। बाद में भी स्तनपान कराया गया या नहीं, यह कह पाना मुश्किल है। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के पास इसका कोई ब्योरा नहीं है। शिशुओं को स्तनपान न कराने के पीछे प्रसूताओं में फीगर बिगड़ने का भ्रम और कुछ की मजबूरी कारण मानी जा रही है। यह खुलासा शासन को भेजी गई स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से हुआ है।
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शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने फरवरी से मई तक जन्मे शिशुओं का ब्योरा तैयार कराया। पाया गया कि करीब 8080 शिशुओं का जन्म हुआ। इस बात की तलाश शुरू हुई कि इनमें से कितने शिशु ऐसे हैं जिन्हें जन्म के घंटे भर के अंदर स्तनपान कराया गया। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया कि जन्म के बाद घंटे भर के भीतर 6478 शिशुओं को प्रसूताओं ने स्तनपान करा दिया है। आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति स्पष्ट है कि पैदा होने के बाद लगभग 1602 बच्चे घंटे भर के अंदर स्तनपान नहीं कर सके।

इन बच्चों की माताओं ने बाद में उन्हें स्तनपान कराया या नहीं, इस बात की जानकारी विभाग के पास भी नहीं है। ऐसे में साफ तौर से यह कह पाना मुश्किल हो गया है कि 1602 शिशुओं की माताओं ने स्तनपान कराया या नहीं। वैसे जानकार कहते हैं कि इनमें से कुछ प्रसूताओं ने फीगर बिगड़ने के डर से शिशुओं को स्तनपान नहीं कराया। जबकि बच्चे के लिए मां का पहला दूध अमृत माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग के लोग ही दबी जुबान यह मानते हैं कि 1602 शिशुओं को स्तनपान कराया ही नहीं गया।
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8080 शिशुओं का अस्पतालों में नर्सों के जरिए वजन किया गया। पाया गया कि इनमें से तीन हजार 226 शिशुओं का वजन ढाई किलो से कम है। डॉक्टर ढाई किलो से कम वजन वाले बच्चों को कुपोषित मानते हैं। स्पष्ट है कि जागरूकता के अभाव में गर्भस्थ शिशु भी कुपोषण के शिकार हो रहे हैं। इसकी वजह गर्भवती महिलाओं में जागरूकता का अभाव व गरीबी मानी जा रही है।

जन्म के एक घंटे के अंदर हजारों शिशुओं को स्तनपान कराया गया। जिन शिशुओं को समय के भीतर स्तनपान नहीं कराया जा सका, उसके पीछे उनकी माताओं की मजबूरी रही होगी। अब यह कैसे बताया जा सकता है कि बाद में वे महिलाएं शिशुओं को स्तनपान कराईं या नहीं।
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डॉ. वीके पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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