बेल्हावासियों को भले ही दिल्ली जाने के लिए पद्मावत एक्सप्रेस जैसी ट्रेने मिली है, मगर इसका रखरखाव ठीक नहीं है। बोगियां पूरी तरह से जर्जर हो गई हैं। वर्षों पुरानी ट्रेन की बोगियां न तो बदली जा रही हैं और न ही मरम्मत ठीक से की जा रही है।
पद्मावत एक्सप्रेस की बोगी और कोच पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। कहीं सीटें फट गई हैं तो कहीं खिड़की के पास लगी चादर गायब हो गई है। एसी कोच की खिड़कियां के शीशे भी उखड़ रहे हैं। टेप आदि के सहारे उसे रोका गया है। वाशिंग लाइन की व्यवस्था न होने के कारण ट्रेन में आने वाली खामियां भी ठीक से दूर नहीं की जा रही हैं। सूत्रों की मानें तो ट्रेन को लखनऊ के लिए रवाना कर दिया जाता है। लखनऊ में ट्रेन में आने वाली छोटी-मोटी खामियों को दूर किया जाता है। इससे किसी भी दिन पद्मावत एक्सप्रेस हादसे का शिकार हो सकती है। वर्षों पुरानी ट्रेन होने के बाद भी न तो इसकी बोगियों को बदला जा रहा है और न ही मरम्मत की ओर ध्यान दिया जा रहा है।
प्रतापगढ़ से बनकर चलने वाली ट्रेनों की धुलाई कभी भी नहीं होती है। दरअसल प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर बाहर से ट्रेनों के शीशा की धुलाई करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। खानापूर्ति करने के लिए रेल विभाग ट्रेन के आने के बाद तीन नंबर प्लेटफार्म पर खड़ी कर महज शौचालय या फिर एसी कोच में अंदर से धुलाई कर खानापूर्ति कर लेते हैं। ट्रेनें बनारस, लखनऊ और दिल्ली तक ट्रैकपर दौड़ रही है, मगर विभाग के उच्चाधिकारियों का ध्यान नहीं पड़ रहा है।