लालगंज (ब्यूरो)। सांसद व विधायक के अलावा शासन की तरफ से मिलने वाले सार्वजनिक हैंडपंपों को लगवाने के बाद लाभार्थियों ने उसमें सबमर्सिबल व मोटर लगवा दी। कईयों ने तो सार्वजनिक हैंडपंपो को लगने के बाद उसे बाउंड्री के भीतर कर लिया। सरकारी हैंडपंप लोगों के लिए स्टेटस सिंबल बन गया है। जबकि राहगीर व पड़ोसी पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
सांसद, विधायक या शासन की तरफ से मिलने वाला हैंडपंप सार्वजनिक स्थलों पर लगाने के लिए स्वीकृत होता है। मगर हैंडपंप लगने के कुछ दिनों बाद ही वह दबंगों या प्रभावशाली लोगों के कब्जे में हो जाता है। लोग उसे अपनी बाउंड्री के भीतर कर लेते हैं या फिर रिबोर कराकर घर के भीतर आंगन में लगवा लेते हैं। इलाके के कई गांवों में सार्वजनिक हैंडपंपों पर लोगाें ने कब्जा कर रखा है।
कुछ ने सबमर्सिबल लगा रखा है तो कुछ लोगों ने मोटर बांध रखी है। इसके चलते लोगों को पानी नहीं मिल रहा है। सबमर्सिबल लगाकर हैंडपंप से पाइप जोड़ कर सीधे टंकियों को भरा जाता है। इलाके के उमापुर, सलेमभदारी, खालसा सादात, खानापट्टी समेत सांगीपुर, रामपुर बावली, रानीगंज कैथौला आदि जगहों में लगे तमाम हैंडपंप लोगों के कब्जे में हैं। ऐसे में न तो पड़ोसियों को पानी मिलता है और न ही सार्वजनिक हैंडपंपों से राहगीरों की प्यास बुझ रही है।
सार्वजनिक हैंडपंपाें पर कब्जे को लेकर अधिकारी तनिक भी गंभीर नही हैं। कई गांव के लोगों ने हैंडपंपों पर कब्जे की शिकायत तहसील दिवस से लेकर ब्लाक कार्यालय तक दर्ज कराई। लेकिन अधिकारियों ने जांच के नाम पर खानापूर्ति करते हुए कार्रवाई करने के बजाए पत्र ठंडे बस्ते में डाल दिया। अधिकारी हैंडपंपों पर से दबंगों व प्रभावशाली लोगों का कब्जा हटवाने का साहस नही कर पाते।
हैंडपंपों में सबमर्सिबल व मोटर बांधकर लोग विद्युत विभाग के राजस्व को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कम पावर का घरेलू कनेक्शन लेने के बाद लोग उच्च क्षमता का सबमर्सिबल व मोटर पंप लगवा कर घरों में पानी भरते हैं। साथ ही खेत की सिंचाई भी करते हैं। इसे विद्युत विभाग को भी चूना लग रहा है।