जिला महिला अस्पताल की हालत भी कुछ जुदा नहीं है। प्रसव पीड़िताएं दर्द से तड़प रही हैं और उनका इलाज नर्स कर रही हैं। लेबर रूम में एक बेड पर तीन-तीन महिलाओं को लिटाकर इलाज किया जा रहा है। भीषण गर्मी और उमस के बीच प्रसव पीड़ा से उनकी जान जाने का भी खतरा है। अस्पताल की चिकित्सक मनमानी पर उतारू हैं। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक मरीज तड़प रहे हैं, लेकिन किसी को उनकी फिक्र नहीं। अस्पताल में दलालों का बोलबाला है। वे मरीजों को रेफर कराकर प्राइवेट अस्पताल पहुंचाने में लगे रहते हैं।
दोपहर 12.21 बजे
जिला महिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर रीना प्रसाद की ड्यूटी थी। हालांकि इमरजेंसी से रीना प्रसाद गायब थीं। कक्ष में तैनात नर्स गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण करने के साथ ही उनका इलाज भी कर रही थीं। जबकि रुपापुर की रहने वाली पूजा सिंह प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। उसके बगल एक दलाल बैठी थी। साथ बैठे मरीजों का आरोप था कि वह वहां आए मरीजों को प्राइवेट अस्पताल ले जाने की कोशिश में जुटी थी।
दोपहर 12.09 बजे
जिला महिला अस्पताल के ओपीडी में बने दो कक्ष में से एक कक्ष में ताला लटक रहा था। गर्भवती महिलाएं जांच रिपोर्ट लेकर चिकित्सक को दिखाने के लिए परेशान थीं। गेट से लेकर कक्ष तक महिलाएं लाइन से बैठी थीं। कंधई के नौहर हुसैनपुर से आई दीक्षा पत्नी मिथलेश जांच रिपोर्ट लेकर दस बजे से लाइन में लगी थी और 12 बजे के करीब डॉक्टर जरीना वार्ड से बाहर निकल गईं।
दोपहर 12.13 बजे
सीएमएस कक्ष में सीएमएस डॉक्टर सुलभा पाठक, डॉक्टर संतोष त्रिपाठी, डा. जरीना व डा. नीलमा सोनकर बैठकर गप्पें लड़ा रहे थे। कैमरा चमकते ही लिखापढ़ी शुरू कर दी। जबकि ओपीडी से इमरजेंसी तक मरीजों की भीड़ लगी थी। प्रसव पीड़िताएं दर्द से कराह रही थी और सीएमएस समेत तीन डाक्टर बैठकर बातचीत करने में व्यस्त थे।
दोपहर 12.16 बजेे
बाल रोग विशेषज्ञ डा. इसरार अंसारी के चेंबर के सामने मरीजों की भीड़ थी मगर चेंबर बंद था। सुबह से दोपहर तक चिकित्सक के इंतजार में लोग बैठे रहे। लेकिन डॉक्टर नहीं आए। बीमार बच्चों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि लोग बार-बार चिकित्सक के कक्ष को देख रहे थे। राजगढ़ के अनिल, चिलिबिला के विवेक ने बताया कि वह काफी समय से डाक्टर का इंतजार कर रहे हैं।
व्हीलचेयर पर बैठ रहे तीमारदार प्रसव पीड़िताएं परेशान
जिला महिला अस्पताल में इमरजेंसी कक्ष के सामने तीन व्हील चेयर रखे गए हैं। प्रसव पीड़िता के आने के बाद परिजनों को उसके बारे में जानकारी नहीं होती है तो वे दर्द से तड़प रही महिला को पैदल चलवाते हैं। इससे जच्चा और बच्चा की जान का खतरा बना रहता है। वहीं व्हील चेयर पर प्रसव पीड़िता के साथ आने वाले उनके तीमारदार बैठकर अराम फरमाते हैं।
धूल फांक रही अल्ट्रासाउंड मशीन
जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन लगी है। मगर यह मशीन करीब दो वर्ष से बंद पड़ी है। दो वर्ष से एक भी महिलाओं की जांच नहीं हुई। कारण यह है जिला महिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट की तैनाती नहीं है।
डॉक्टरों की कमी है। दो संविदा सहित सात डॉक्टर की तैनाती है। इसी में से तीन डॉक्टर की ड्यूटी इमरजेंसी में रोजाना बारी-बारी से लगती है। बचे हुए डॉक्टरों की आपरेशन और ओपीडी के साथ नसंबदी में ड्यूटी लगाई जाती है। डॉक्टर के कमी के चलते मुझे भी ओपीडी करनी पड़ती है।
डा. सुलभा पाठक , सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।