ऋण मोचन योजना में शामिल किसानों की संख्या लगातार घटती जा रही है। सत्यापन में जिले के 9,258 किसानों को योजना से बाहर कर दिया गया है। इन किसानों के पास आठ बीघे से अधिक जमीन बताई जा रही है। अब जिला प्रशासन ने पहले चरण में 14,893 किसानों को कर्जमाफी का प्रमाणपत्र देने का फैसला लिया है।
योगी सरकार की कर्जमाफी योजना को लेकर आठ बीघे से अधिक जमीन वाले किसानों को अति उत्साहित होने की आवश्यकता नहीं है। अगर उनके मन में गलतफहमी हो कि वह तथ्य छिपाकर योजना का लाभ ले लेंगे, तो यह संभव नहीं है। जिले में सत्यापन का कार्य बहुत ही गहराई से हो रहा है, इसके चलते अधिकांश किसान योजना से बाहर होते जा रहे हैं। प्रारंभ में जिले के 67,855 किसानों को कर्जमाफी के लिए चिह्नित किया गया था। पहले चरण में आधार कार्ड लिंकअप कराने वाले 37,546 किसानों का सत्यापन कराकर कर्जमाफी का प्रमाणपत्र वितरित करने की योजना थी। मगर सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में फर्जीवाडे़ और किसानों के अपात्र मिलने से लाभार्थियों की संख्या घटती जा रही है। अभी तक पहले चरण में 37,546 लाभार्थियों को कर्जमाफी का प्रमाणपत्र बांटने का दावा करने वाले अधिकारी अब 14,893 किसानों को प्रमाण पत्र देने की बात कह रहे हैं। जिला प्रशासन की कसौटी पर खरे उतरने वाले 14,893 किसानों को पांच सितंबर को प्रभारी मंत्री स्वाती सिंह के हाथों पर प्रमाणपत्र वितरित किया जाएगा। जबकि सत्यापन में 9,258 किसानों को योजना से बाहर किया जा चुका है।
हालांकि अधिकारी अभी किसी भी किसान को अपात्र बताने को तैयार नहीं है। जिला कृषि अधिकारी अश्विनी सिंह ने बताया कि कोई किसान तब तक अपात्र नहीं कहा जाएगा, तब तक ऋण मोचन की योजना समाप्त नहीं हो जाती है। उन्होंने बताया कि जो किसान मानक पर खरे नहीं उतर रहे हैं, ऐेसे किसानों का पुुन: सत्यापन कराया जाएगा।