जिला अस्पताल में आईसीयू की व्यवस्था नहीं है। जबकि दमा रोगियों और ब्रेन हैमरेज के मरीजों को आईसीयू में रखना अनिवार्य होता है। अव्यवस्था के चलते चिकित्सक दमा रोगियों को प्रयागराज रेफर कर दे रहे हैं। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं।
190 बेड के जिला अस्पताल में आईसीयू की व्यवस्था तक नहीं है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की हालत में कुछ सुधार होने पर उन्हें वार्ड में भेज दिया जाता है। नाजुक हालत होने पर चिकित्सक प्रयागराज रेफर कर देते हैं। मगर सीएमएस का ध्यान जिला अस्पताल के आईसीयू की ओर नहीं जा रहा है। जबकि इन दिनों ठंड से दिल और दिमाग को जहां झटका लग रहा है वहीं दमा रोगियों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।
जिला अस्पताल में इस समय इमरजेंसी और मेडिकल वार्ड को मिलाकर कुल 37 दमा रोगी भर्ती हैं। 5 लोगों को दिल का दौरा पड़ा है तो 13 लोगों को ब्रेन हैमरेज हुआ है। आईसीयू की व्यवस्था न होने के कारण जिला अस्पताल के इमरजेंसी में तैनात मेडिकल ऑफिसर ऐसे मरीजों को सीधे प्रयागराज रेफर कर देते हैं।
परिजन ले जाने में असमर्थता जताते हैं तो चिकित्सक वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर देते हैं। आईसीयू की व्यवस्था न होने की जानकारी तीमारदारों को दे दी जाती है।
लंबे समय से लटक रहा ताला
सीएमएस रहे डॉक्टर योगेंद्र यति ने आईसीयू वार्ड को खत्म करवाकर फीजियोथिरेपी कक्ष बनवा दिया था। आईसीयू वार्ड में लगे पल्समॉनिटर और ऑक्सीजन पाइप लाइन को हटवा दिया गया।
डॉक्टर और स्टाफ की कमी बना बहाना
जिला अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ नर्स की कमी आईसीयू वार्ड में ताला लटकने का बहाना बन गया है। विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि डॉक्टर और नर्स की कमी के चलते आईसीयू वार्ड को चालू नहीं किया जा रहा है। जिससे मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। दोपहर बाद महज एक डॉक्टर के भरोसे 190 मरीजों का इलाज होता है।
डॉक्टर और कर्मचारी दोनों की कमी है। आईसीयू वार्ड में जो व्यवस्था होनी चाहिए, वह नहीं है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही आईसीयू वार्ड को बहाल कराने की मांग की जाएगी। डॉक्टर पीपी पांडेय, सीएमएस, जिला अस्पताल।