ग्रामप्रधान, बीडीसी सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाली महिलाओं को जमानत राशि में भले ही पचास प्रतिशत की छूट दी गई थी, मगर विधानसभा चुनाव में उन्हें कोई रियायत नहीं मिलेगी। सिर्फ अनुसूचित जाति और जनजाति के पुरुष और महिला उम्मीदवारों की जमानत राशि में आधी छूट दी गई है।
विधानसभा चुनाव में कूदने वाली महिलाओं को चुनाव में कोई विशेष साहूलियत नहीं दी जाएगी। जो व्यवस्था पुरुषों के लिए होगी, वहीं महिला उम्मीदवारों के लिए भी होगी। जिले की सात विधानसभा सीटों पर 30 जनवरी से होने वाले नामांकन के लिए सभी प्रत्याशियों को फार्म नि:शुल्क मुहैया कराया जाएगा। महिला और पुुरुष उम्मीदवारों को दस-दस हजार रुपये जमानत राशि के रूप में जमा करना होगा।
जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति के उम्मीदवारों के जमानत राशि में पांच हजार रुपये की छूट दी गई है। पंचायत चुनाव में सामान्य, पिछड़ी और अनुसूचित जाति की महिलाओं को नामांकन पत्र खरीदने और जमानत राशि में पचास प्रतिशत की छूट दी गई थी। इससे महिलाओं में चुनाव लड़ने को लेकर काफी उत्साह देखा गया था। पंचायत चुनाव में महिलाओं को जमानत राशि में छूट मिलने का असर यह दिखा कि पचास प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने पंचायत की कमान संभाल रखी है। मगर विधानसभा चुनाव में छूट नहीं मिलने से महिला उम्मीदवारों को बड़ा झटका लगा है। सहायक निर्वाचन अधिकारी एसपी बरनवाल ने बताया कि विधानसभा चुनाव में महिलाओं के लिए कोई विशेष छूट नहीं दी गई है। सिर्फ एससी और एसटी उम्मीदवारों को जमानत राशि में पचास प्रतिशत की छूट मिलेगी।
निर्दलीय प्रत्याशियों को देने होंगे दस प्रस्तावक
निर्दलीय प्रत्याशियों को दस-दस प्रस्तावक देना होगा, जबकि राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को एक-एक प्रस्तावक देना होगा। सभी प्रत्याशियों को तीन-तीन शपथपत्र भी देना होगा।