ज्यादातर गर्मी में लगने वाली आग को लेकर प्रशासन तनिक भी गंभीर नहीं है। पानी की अनुपलब्धता देख फायर ब्रिगेड अफसर बगैर घटना काफी परेशान हैं। शहर में बने 13 ‘फायर हाइड्रेंट’ में सात मिट्टी के नीचे दब चुके हैं। इनका नामोनिशान मिल गया है। बचे हुए छह का रिबोर न होने से वे बेकार हैं।
पानी सप्लाई के लिए रोड किनारे पाइप बिछाई गई हैं। इस पर जगह-जगह टोटियां लगाई गई थीं। जिससे आग लगने पर दमकल कर्मी गाड़ियों में पानी भरते थे। इस स्थान को फायर हाइड्रेंट के नाम से जाना जाता है। सभी विगत कई साल से खराब हैं। सीवर लाइन के लिए खुदाई के समय सात फायर हाइड्रेंट मिट्टी में दब गए। जलनिगम व नगर पालिका ने तनिक भी ध्यान नहीं दिया। सात रिबोर के काबिल हैं। रिबोर के लिए अग्नि शमन अधिकारी ने दर्जनों बार जलनिगम, नगर पालिका व जिला प्रशासन को पत्र लिखा।
कोई कार्रवाई न होने पर कई दफा रिमाइंडर भी भेजा गया। फिर भी प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा। हजारों लोगों व उनकी गृहस्थी और दुकानों की सुरक्षा से जुड़े फायर हाइड्रेंट को दुरुस्त कराने की तरफ डीएम भी ध्यान नहीं दे रहे। हालात गवाह हैं कि यदि गर्मी के दिनों में ईश्वर न करे शहर में कहीं आग लगे। यदि लग गई तो पानी के अभाव में उसे बुझा पाना फायर कर्मियों के बस में भी नहीं होगा।
दमकल कर्मियों के पास दो बड़ी टैंकर गाड़ियां हैं। दोनों में करीब चार-चार हजार लीटर पानी आता है। बाकी दो बोलेरो टाइप हैं। यह वाहन कहीं पानी भरा होने पर ही काम कर सकेगा। शहर में किसी भी जगह ऐसी व्यवस्था नहीं जहां पानी भरा हो और उसमें पाइप लगाकर फायर कर्मी आग बुझा सकें। दो टैंकर गाड़ियों में भरा पानी आग बुझाने के लिए पर्याप्त नहीं है।