‘मेरे जीवन का आधार तू है, मेरी आकृति का आकार तू है, मेरी सांसों को सजाया है तूने, मेरी मांग का संस्कार तू है’। जैसी पंक्तियों के साथ मंगलवार को पीबीपीजी कॉलेज के मंच पर बसंत में भारतीय संस्कृति की अनोखी छटा बिखरी। स्पिक मैके की ओर से प्रसिद्ध गायक खेता खान व उनकी टीम की प्रस्तुति ने लोगों का दिल जीत लिया। इस मौके पर कॉलेज की छात्राओं ने भी कला का प्रदर्शन किया।
कॉलेज में कालबेरिया जनजातियों के जरिए नाग एवं नागिन का नृत्य देख लोग चकित रहे। यहां यह बताना जरूरी है कि कालबेरिया जनजाति राजस्थान के जैसलमेर में पाई जाती है। इस नृत्य कला में उनकी बिरादरी न सिर्फ पारंगत है बल्कि नाम भी कमाया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसपी सिंह ने बताया कि उनकी संस्था युवा पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का काम करती है। स्पिकमैके की संयोजिका श्रद्धा सिंह ने गायक खेता खान की टीम से सभी का परिचय कराया। खेता खान की टीम ने गीत और नृत्य की प्रस्तुति शुरू किया तो लोग अपलक निहारते रहे।
संचालन एमएससी की छात्रा स्निग्धा सिंह ने किया। डॉ.शिवानी मातनहेलिया ने खेता खान के संघर्षों पर प्रकाश डाला। अनु, सुप्रिया, अभिलाष मिश्र, अंशुल सिंह, तुलसीदास यादव सहित कई छात्र व छात्राओं ने खेता खान से उनकी कला व ख्याति के बारे में सवाल कर जानकारी ली। महाविद्यालय के प्रबंधक राजा अनिल प्रताप सिंह ने लोक कला एवं संस्कृति से जुड़ी प्रसिद्ध राजस्थान की संस्कृति पर प्रकाश डाला। प्रबंधक ने सफलता का अनूढ़ मंत्र दिया। कहा कि सफलता जेब से हाथ निकालने के बाद ही मिलती है। हाथ बांध कर बैठे रहने से कोई किसी भी लक्ष्य को नहीं प्राप्त कर सकता। प्राचार्य डॉ.बृजभानु सिंह ने आभार जताया।