कुंडा से जेठवारा तक बन रही सड़क अभी से ही खूनी कहलाने लगी है। दो माह के भीतर दरोगा समेत तीन लोगों की जान इस सड़क पर जा चुकी है। इसके लिए सड़क निर्माण कच्छप गति से होना भी काफी हद तक जिम्मेदार है। इससे इस मार्ग पर चलने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कुंडा से जेठवारा मार्ग का निर्माण जुलाई वर्ष 2013 से प्रारंभ हुआ है। बाजारों में तो आधी अधूरी सीसी सड़क बना दी गई लेकिन दूसरे स्थानों पर खोदाई के बाद गिट्टी बिछाकर छोड़ दिया गया है। इस सड़क पर दो माह के भीतर दरोगा समेत तीन लोगों की जान जा चुकी है। महेशंगज थाना क्षेत्र के अंजनी गांव के करीब कुंडा कोतवाली के वजीरपुर निवासी रामबहादुर पटेल की 30 दिसंबर को दुर्घटना में मौत हो गई।
दूसरी ओर 4 दिसंबर को कुंडा कोतवाली के तिलौरी निवासी निर्मला देवी पत्नी हरीलाल को ताजपुर के करीब वाहन ने टक्कर मार दिया। इससे उसकी भी मौत हो गई। इसके अलावा अब तक दर्जनों लोग इस मार्ग पर दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं। हीरागंज बाजार में दुर्घटना का शिकार राजेश केसरवानी अभी भी जीवन और मौत के बीच अस्पताल में संघर्ष कर रहा है। 2 फरवरी को महेशगंज थाने में तैनात दरोगा प्रेम नारायण यादव की मौत के बाद इलाके के लोग इस सड़क को खूनी सड़क कहने लगे हैं। कच्छप गति से बन रही सड़क के सिलसिले में इलाके के जनप्रतिनिधियों ने कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। इसके बाद भी निर्माण कराने वाली संस्था कच्छप गति से काम करा रही है।