माता-पिता बनना ही खुशियों के साथ ही अपने साथ कुछ जिम्मेदारियां भी लेकर आता है। बच्चे की पहली किलकारी, उसे गोद में उठाना, उसके नाजुक अंगों को पकड़ना...इन सबका एहसास ही अलग होता है। छोटे बच्चों को थोड़ा एक्स्ट्रा देखरेख की जरूरत होती है। क्योंकि उनकी स्किन बहुत सेंसिटिव होती है। इस उद्देश्य से तुलसी सदन हादीहाल में शिशुओं के उचित देखभाल को लेकर आशा बहू को जागरुक किया गया।
अमर उजाला के सहयोग व जॉनसन्स बेबी की ओर से बेस्ट पहले पल से कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने नवजात को नाजुक फूल बताते हुए उनकी विशेष देखभाल करने की सलाह दी। कार्यक्रम का शुभारंभ सीएमओ डाॅ. जीएम शुक्ल ने दीप प्रज्जवलित कर किया। महिला डॉ. पारूल सक्सेना ने कहा कि शिशु की त्वचा किसी वयस्क व्यक्ति की त्वचा की तुलना में 30 प्रतिशत तक पतली होती है, उनकी त्वचा की संरक्षक लेयर पूरी तरह से विकसित नहीं हुई होती है।
इसी वजह से शिशु की त्वचा दोगुनी तेजी से रूखी होती है। शिशु की त्वचा का पीएच भी बदलता रहता है जिससे सूखापन और जलन होने का खतरा होता है। शिशु की त्वचा की नाजुक प्रकृति को देखते हुए इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) ने नवजात शिशुओं और बच्चों की गुणवत्तापूर्ण बाल और त्वचा की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए कुछ दिशा-निर्देश दिए हैं।
जॉनसन्स बेबी कंपनी के प्रतिनिधि विमुक्ति त्रिपाठी ने कहा कि बच्चे फूल जैसे होते हैं। इस लिए जॉनसन्स बेबी कंपनी ने बच्चों की फूल सी त्वचा को ध्यान में रखते हुए तेल, साबुन, क्रीम, आदि उत्पाद बनाए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को सरसो का तेल या फिर जैतून के तेलो से मालिश नहीं करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डिंपल सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि आशा प्रत्येक मां और शिशु को सुरक्षित रखने में अपनी अहम भूमिका निभाती हैं। इस दौरान आशाओं को जॉनसन्स बेबी किट भी वितरण किया गया।