रविवार को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की विधिविधान से पूजा की गई। देवी की प्रसन्नता पाने के लिए भक्तों ने उनको प्रिय बेला और चमेली के फूल और चुनरी चढ़ाई। दुर्गाष्टमी पर मां के स्वरूप के दर्शन को लालायित भक्तों की भीड़ मां बेल्हादेवी मंदिर, चंडिका देवी, ज्वाला और चौहरजनदेवी में महाआरती के आयोजन में उमड़ी रही। कन्याओं को भोज कराया गया।
सुहाग और सुख संपदा की कामना के लिए देवी मां को चुनरी भेंट कर महिलाओं ने उनकी विशेष पूजा की। हाथ में सफेद फूल लेकर मां का ध्यान किया। मान्यता है कि महागौरी की उत्पत्ति की कथा मां पार्वती से हुई है।
घरों और पंडालों में आज के दिन देवी रूप धर के आई कन्याओं को भोजन कराया गया। उनको हलुवा, पूड़ी, चना, दही, जलेबी, केला से भोग लगाकर उपहार भेंट किया गया। रेलवे स्टेशन पार्क में दुर्गा पंडाल में कन्याओं को भोज कराया गया। बेल्हादेवी धाम और उसके इर्द-गिर्द पंडाल लगाकर लोगाें ने हलुवा, पूड़ी का प्रसाद बांटा।
इंद्रधनुषी पंडाल बना आकर्षक का केंद्रःजय मां दुर्गा पूजा समिति हनुमान मंदिर चिलबिला तालाब पर मां के भक्तों का रेला लगा रहा। यहां इंद्रधनुष स्वरूप में पंडाल बनाया गया है। भक्त पंडाल से होकर मां वैष्णवों की गुफा में प्रवेश कर ठंडे पानी में होकर गुफा के अंदर जाकर मां दुर्गा के दर्शन कर रहे हैं।