महाकुंभ की अलौकिकता मन में समाई है। पांच दिनों तक स्नान करने के बाद भी मन नहीं भरा, दोबारा जाकर पुण्य की डुबकी लगाऊंगा। यह बातें बुधवार को संगमनगरी से लौटे पट्टी के रइर्मपुर दिशिनी गांव निवासी देव नारायन मिश्र (65) ने कहीं।
उन्होंने बताया कि महाकुंभ के अमृत स्नान के लिए वह शुक्रवार को ही प्रयागराज पहुंच गए थे। कल्पवास कर रहे रिश्तेदारों के टेंट में रहकर पांच दिनों तक गंगा में डुबकी लगाई। लेकिन, मन नहीं भरा। अब रविवार को फिर से संगमनगरी जाऊंगा। साथी गांव के जितेंद्र तिवारी ने बताया कि महाकुंभ का ऐसा अद्भुत नजारा है कि वहां से आने का मन नहीं कर रहा था। पांच दिन कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला। सरकार ने महाकुंभ की दिव्यता और भव्यता को बहुत ही शानदार तरीके से दिखाया है।