फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यक्ष-युधिष्ठिर संवाद स्थल को भी नहीं मिला मुकाम

Thu, 14 Jul 2016 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
विज्ञापन
mudda belha ki virasat ka
विज्ञापन
जिला मुख्यालय से मात्र 15 किमी की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण यक्ष-युधिष्ठिर संवाद स्थल भी बदहाल है। प्रयास तो कई बार हुए, लेकिन इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजा नहीं जा सका। पुरातत्व विभाग को खुदाई के दौरान यहां से कई दुर्लभ वस्तुएं मिली थीं। इसके बाद भी किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। शासन अगर ध्यान देता तो इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता था।
विज्ञापन


पौराणिक स्थल अजगरा में शासन-प्रशासन की तरफ से कुछ भी नहीं कराया जा सका है। हर साल जिला प्रशासन व क्षेत्रिय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से तीन दिवसीय अजगरा महोत्सव कराकर खानापूर्ति कर ली जाती है। महाभारत कालीन यक्ष-युधिष्ठिर संवाद स्थल पर देश-विदेश से अध्ययन करने के लिए शोधार्थी व पर्यटक भी आते हैं। इतिहास पर नजर डालें तो यहां महाभारत काल के दौरान यक्ष युद्धिष्ठिर संवाद का उल्लेख मिलता है। किवंदती है कि राजा नहुष के अजगर प्रसंग के कारण इसका नाम अजगरा पड़ा। सैकड़ों वर्ष पहले यहां बाबा अजगर के नाम से मंदिर की स्थापना भी हुई थी। महाभारत कालीन सरोवर की खुदाई के समय अनेक शिलालेख एवं पांडुलिपियां मिली थीं।

जिन्हें रखने के लिए कोई स्थान नहीं बना। वर्ष 1997 में तत्कालीन क्षेत्रीय विधायक स्व. राजाराम पांडेय व निर्झर प्रतापगढ़ी द्वारा संग्रहालय बनवाया गया था। जिसमें आज भी पांडुलिपियां शिलालेख, प्रस्तर लेख, प्रस्तर मूर्तिया, मिट्टी की मूर्तियां, धातु औजार, प्रस्तर औजर, सिक्कें, आभूषण, नरकंकाल, ईंटे अनाज पीसने का उपकरण, मिट्टी के बर्तन, मुहरें आदि समान रखे हुए हैं।
विज्ञापन


सड़क तक ठीक नहीं, परेशान होते हैं लोग  
शहर से 15 किमी दूर स्थित यक्ष युद्धिष्ठिर संवाद स्थल पर शासन व प्रशासन का ध्यान नहीं पड़ रहा है। यहां तीन दिवसीय अजगरा महोत्सव भी होता है। दूरदराज से लोग आते हैं। मगर व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। मेला स्थल से चारों तरफ की सड़कें पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं। यक्ष-युद्धिष्ठिर संवाद स्थल पर बना तालाब भी बदहाल पड़ा है।  
जर्जर हो गया है अजगर बाबा का मंदिर
गुप्तकालीन देश के एक मात्र अजगर मंदिर की ओर शासन व प्रशासन के साथ ही जनप्रतिनिधियों का ध्यान नहीं पड़ रहा है। इसके चलते उत्तर दिशा में मंदिर झुक कर गिरने के कगार पर पहुंच गया है। सरोवर के किनारे बना परिक्रमा मार्ग व स्नान घाट कई स्थानों से टूटकर गिर चुका है।
विदेशों से आते हैं शोधार्थी व पर्यटक
विदेशों से अध्ययन करने के लिए शोधार्थी व पर्यटक भी अजगरा में आते हैं। मगर उनके रुकने व बैठने के लिए कोई स्थान नहीं बना है। इससे उन्हें परेशान होना पड़ता है। किसी न किसी बाहरी लोगों के घर पर रात गुजारनी पड़ती है।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें