जिले के भूमाफिया के खेल में आवास विकास परिषद फेल हो गया है। भूमाफिया सरकारी जमीन की नवैयत बदल प्लाटिंग करने के बाद ऊंचे दाम पर बेच रहे हैं। वहीं आवास विकास परिषद को 34 साल बाद भी शहर के इर्द-गिर्द कालोनी बनाने के लिए जगह नहीं मिली। कालोनी बसाने के लिए जब कभी भी जमीन खरीदने की तैयारी की जाती है, उससे पहले दोगुने दाम पर भूमाफिया खरीद लेते हैं। इससे विभाग का हौसला टूट चुका है।
जिले में 1980 में आवास विकास परिषद की स्थापना तो हुई, मगर 1982 में मीराभवन चौराहे पर कालोनी बनाने के बाद विभाग के अफसरों का सारा उत्साह ही गायब हो गया। शहर ही नहीं तहसील मुख्यालयों में भी आवास विकास को पर्याप्त जमीन नहीं मिलने की वजह भूमाफिया की सक्रियता रही। शहर में बिल्डर और भूमाफिया इतने हावी हैं कि जिले के अफसर जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई नहीं करना चाहते हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन की प्लाटिंग कर बेचा जा रहा है। राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते जीएस लैंड की नवैयत बदलकर उसे आबादी में तब्दील कर दिया जाता है, जिस पर भारी भरकम भवन बनवा दिया जाता है। सरकारी जमीन की नवैयत बदलने में लेखपाल से लेकर अफसरों तक का रोल होता है। मगर रुपये के आगे कोई भी वास्तविकता जानने का प्रयास नहीं करता है।
शहर के दहिलामऊ इलाके में खेल के मैदान के लिए पड़ी सवा बीघे जमीन की प्लाटिंग कर बेची जा रही है। दरअसल में दहिलामऊ उत्तरी का अधिकांश भाग ग्रामीण इलाके में आता है। ग्राम प्रधान और लेखपाल की मिलीभगत से हो रहे इस खेल में जिला प्रशासन भी चुप्पी साधे हुए हैं। यह तो महज एक उदाहरण है शिवजीपुरम, रूपापुर, देवकली, रामजीपुरम, सगरा, कादीपुर, रंजीतपुर चिलबिला, महुली, करनपुर, जोगापुर, शुकुलपुर, भंगवा, पटखौली, किशुनदासपुर में सरकारी जमीन पर प्लाटिंग का खेल जोर-शोर से चल रहा है।