इस बार नवरात्र के महापर्व पर नवदुर्गा पंडालों में प्राकृतिक सौंदर्य के बीच मां भवानी विराजेंगी। पंडालों में हरियाली, झरने व कल-कल करतीं नदियों का दृश्य दिखेगा। मूर्तिकार इको फ्रेंडली मूर्तियों को गढने के साथ ही सिंहासन को प्राकृतिक छटा के कलेवर में उतार रहे हैं।
मां दुर्गा के पूजन का महापर्व नवरात्र 29 सितंबर से शुरू हो रहा है। पखवारे भर बाद जिलेभर में मंा नवदुर्गा का पूजन-अर्चन शुरू हो जाएगा। पंडालों में मां नवदुर्गा की प्रतिमाएं विराजेंगी। नौ दिनों तक लकदक करते पंडालों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। इस बार देवी पंडालों मेें देवी मां की ईको फ्रेंडली मूर्तियां विराजमान होंगी।
दरअसल, देवी प्रतिमाओं को गढ़ रहे मूर्तिकारों ने भी पर्यावरण संरक्षण का मिशन बना रखा है। मूर्तिकारों ने केमिकलयुक्त कलर से तौबा कर लिया है। मूर्तियों को सजाने में हर्बल रंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। शहर के चिलबिला में कोलकाता से आए मूर्तिकार न सिर्फ हर्बल रंगों का इस्तेमाल कर मूर्तियां बना रहे हैं, बल्कि उनका प्रयास पूरे पंडाल को प्रकृति सौंदर्य से जोड़ना है।
कोलकाता से आए मूर्तिकार एससी पाल, भीम, विजय ने बताया कि मूर्तियां इको फ्रेंडली हैं। पंडाल में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। इसलिए देवी मां का सिंहासन प्राकृतिक सौंदर्य से जोड़ा गया है। नदियां, झरने व हरियाली के दृश्य के बीच मां सिंहासन पर विराजमान हैं। ऐसे में पंडाल प्रकृति सौंदर्य से ओतप्रोत होंगे। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देंगे।
गनर मशीन से हो रही फिनिशिंग
मूर्तियों को तराशने के लिए मूर्तिकार गनर मशीन लेकर आए हैं। वह मशीन के माध्यम से फिनिशिंग कर रहे हैं। इससे महज 10 से 15 मिनट के भीतर मूर्तियों की फिनिशिंग हो जाती है।
इन सामग्रियों से तैयार होती हैं इको फ्रेंडली मूर्तियां
वाटर कलर, हर्बल कलर, पीली मिट्टी, काली मिट्टी, पिलाका, तालाब की मिट्टी, सफेद खडियां आदि के इस्तेमाल से मूर्तियां तैयार होती हैं।
बना रहे 13 फिट ऊंची कोलकाता की प्रसिद्ध नटराज कलेवर की मूर्ति
एससी पाल ने बताया कि कोलकाता में नटराज मूर्ति प्रसिद्ध है। बेल्हा में भी इस कलेवर की मूर्तियां तैयार की जा रही है। यह 13 फिट ऊंची व 20 फिट चौड़ी होगी।
शारदीय नवरात्र देवी पूजा को मातारानी की प्रतिमा को पेंट करता कलाकार।- फोटो : PRATAPGARH
चिलबिला हनुमान मंदिर के पीछे शारदीय नवरात्र की तैयारी में देवी प्रतिमाओं को बनाते कलाकार।- फोटो : PRATAPGARH