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‘मोहन’ को ले जाने को लेकर पनपा जनाक्रोश

Sat, 21 Mar 2015 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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वनविभाग द्वारा कस्बा स्थित बाग में बंधे हाथी ‘मोहन’ को ले जाने को लेकर भारी जनाक्रोश पनप उठा। शनिवार को वनविभाग के अफसरों की टीम अचानक शाम करीब चार बजे सिनेमा हाल के पीछे बाग में आ पहुंची। यहां पहले से बंधे हाथी मोहन को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर टीम ले जाने के लिए वैन पर लादने की तैयारी करने लगी। हाथी को मथुरा स्थित ऐलीफैन्ट रेसक्यू सेंटर पहुंचाने की वनविभाग की टीम अभी तैयारी कर ही रही थी कि पतुलकी निवासी हाथी मालिक भूपेन्द्र मिश्र को इसकी भनक लग गई। हाथी मालिक भूपेन्द्र अपने परिजनों के साथ बाग में आ पहुंचे। परिजनों ने वनविभाग के अफसरों से हाथी न ले जाने की गुहार शुरू कर दी।
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इस बीच मोहन को मथुरा ले जाने की भनक कस्बा समेत आसपास के गांवों में आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते थोड़ी ही देर में वहां करीब दो हजार ग्रामीणों का मजमा बाग में जमा हो गय। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं भी रहीं। भीड़ भी वनविभाग के अफसरों से हाथी न ले जाने को लेकर जद्दोजहद करने लगी। लोगों का मजमा बढ़ता देख लालगंज कोतवाल सभाजीत मिश्र कोतवाली पुलिस के साथ मौके पर आ जमे। पुलिस ग्रामीणों को समझाने का प्रयास जरूर करने में जुटी पर वे कुछ भी सुनने को तैयार न थे। डीएफओ वाईपी शुक्ला ने हालात के मद्देनजर जिला मुख्यालय से प्रशासनिक मदद मांगी। इस पर आनन फानन में  सीओ सीताराम के साथ सांगीपुर, संग्रामगढ़ तथा उदयपुर थानाध्यक्षों के साथ बाग में पहुंचे। सीओ के साथ थानाध्यक्षों ने हाथी को वैन पर ले जाने की जैसे ही बात कही। भीड़ का गुस्सा भड़क उठा। भीड़ पुलिस व प्रशासन विरोधी नारे लगाने लगी।

इस बीच सांसद प्रमोद तिवारी के निर्देश पर उनके मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल मौके पर पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी से फोन पर वार्ता कर स्थिति से अवगत कराया। डीएम ने हाथी को फिलहाल न ले जाने का आश्वासन दिया। डीएम के आश्वासन पर लोगों को गुस्सा शांत हो सका। डीएफओ वाईपी शुक्ला ने भी जिलाधिकारी से फोन पर आवश्यक निर्देश मांगा। डीएम ने डीएफओ को फिलहाल हाथी न ले जाने का आदेश दिया। तब कहीं जाकर भीड़ का गुस्सा शांत हो सका। इसके पहले डीएफओ वाईपी शुक्ला की अगुवाई में मथुरा ऐलीफैन्ट रेसक्यू सेंटर के प्राणि चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम ने हाथी को बेहोशी का इंजेक्शन भी लगाया। टीम के विशेषज्ञ डॉ. मैथ्यू का कहना था कि इंजेक्शन लगाने के आधे घंटे बाद हाथी को बेहोशी हालत में वैन से ले जाया जा सकेगा। इधर महावत गुलाम ने हाथी को गुड़ तथा पानी का लगातार सेवन कराया। वहीं हाथी स्वामी भूपेन्द्र मिश्र परिजनों के साथ उसे गंगाजल पिलाते पूजा अर्चना में जुट गए। परिजनों में अधिवक्ता सोमनाथ मिश्र समेत घर वालों का रो-रोकर बुरा हाल था। वहीं लोगों में भी हाथी के जुदा होने को लेकर गम भी साफ झलक रहा था।
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हाथी को न ले जाने के वनविभाग के अफसरों के बैक फुट पर आने के बाद डॉ. मैथ्यू ने उसे फिर होश में लाने का इंजेक्शन लगाया। इधर डीएफओ वाईपी शुक्ला का कहना है कि हाथी का स्वामित्व अब भारत सरकार के हाथ है। इसका लाइसेंस परिजनों ने रिन्यू नहीं कराया। जबकि हाथी मालिक भूपेन्द्र मिश्र व उपेंद्र मिश्र का कहना है हाथी के स्वामित्व को लेकर जिला जज के न्यायालय में अभी भी मुकदमा विचाराधीन है। ऐसे में वनविभाग के अफसर हाथी को जबरिया ले जाने का उपक्रम कर रहे हैं। वनविभाग की टीम में कानपुर प्राणि उद्यान के विशेषज्ञ भी शामिल थे। शाम लगभग साढ़े सात बजे तक भीड़ का आलम बाग में जुटा रहा। वनविभाग व प्रशासनिक अफसरों की टीम के वापस जाने के बाद ही भीड़ गांव को लौटी। इधर परिजनों के साथ जमा कस्बावासियों ने बाग में सुंदरकांड का पाठ भी शुरू कर दिया। भीड़ बराबर गजानन महाराज व गणेश जी के नाम पर जयकारे लगाती रही।

‘मोहन’ की जुदाई भीड़ को ही नहीं बल्कि लोगों से खुद जुदा होने को लेकर हाथी के चेहरे पर भी दुख साफ झलक रहा था। मोहन की आंखों से लगातार बह रहा आंसू या तो चिकित्सा टीम के द्वारा लगाए गए इंजेक्शन का दर्द बयां कर रहा था या फिर उसे अपनों से वर्षों बाद दूर जाने का गम साल रहा था। मोहन की आंखों में आंसू देख महिलाएं भी फफक-फ फक कर रोने लगीं। गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व मोहन हाथी का मिजाज बिगड़ने पर एक व्यक्ति ने उसे गोली मारकर घायल कर दिया था। इसके बाद कस्बे में कई दिनों तक अफरा तफरी का माहौल भी बन गया था। धीरे-धीरे मोहन का गुस्सा शांत हो सका था।
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