कोर्ट के आदेश पर एक व्यक्ति के यहां रहे हाथी को कब्जे में लेनेे के लिए जिला प्रशासन को बीस घंटे पसीना बहाना पड़ा। एसपी, पीएसी, वनविभाग, वन्य जीव विशेषज्ञों की टीम और दस थानों की फोर्स को कड़ी मशक्कत के बाद कामयाबी मिल सकी और ट्रक पर लादकर उसे ले जाया गया। उसे ट्रक पर लादने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने इंजेक्शन भरना शुरू किया तो वहां मौजूद भीड़ भड़क गई। गुस्साए लोगों ने उनकी जमकर पिटाई कर दी। हालांकि प्रशासन ने किसी तरह बीचबचाव कर बड़ा बवाल होने से बचा लिया। हाथी का नया आशियाना अब चिलबिला जंगल होगा। इसकी देखरेख वन विभाग के कर्मचारी करेंगे। बिना लाइसेंस हाथी रखने के मामले में तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। केंद्र सरकार की ओर से भी वन्यजीव को आजाद कराने का पत्र जारी किया गया था।
लालगंज इलाके के पतुलकी निवासी भूपेंद्र नारायण मिश्र के पास लगभग तीस वर्षों से हाथी था। लालगंज कस्बे के लोग उसे मोहन के नाम से बुलाते थे। कोर्ट और केंद्र सरकार के वन्य जीव को बिना लाइसेंस रखने पर रोक लगाने के बाद सालभर से मोहन को जिला प्रशासन कब्जे में लेने का प्रयास कर रहा था। स्थानीय लोगों के आक्रोश के चलते प्रशासन ने इसे कब्जे में लेने का अभियान ठंडे बस्ते में डाल दिया था। केंद्र सरकार की सख्ती और इधर पखवारे भर पहले न्यायालय ने जिला प्रशासन को दिए आदेश में साफ कर दिया कि बिना लाइसेंस लालगंज में रखे हाथी को कब्जे में लेकर वन विभाग के हवाले किया जाए। इसके चलते बीते 19 जुलाई को वन क्षेत्राधिकारी भाष्कर पांडेय ने न्यायालय के आदेश पर लालगंज कोतवाली में भूपेंद्र नारायण मिश्र, सुनील मिश्र व महावत वारिश गुलाम के खिलाफ बिना लाइसेंस वन्यजीव हाथी रखने का केस दर्ज कराया। इसी के साथ जिला प्रशासन ने मोहन को कब्जे में लेने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी। इसके तहत बुधवार की शाम सात बजे पुलिस अधीक्षक एमपी वर्मा दस थानों की फोर्स और पीएसी तथा वन विभाग की टीम के साथ कोतवाली पहुंच गए। साल भर पहले हजारों क्षेत्रीय लोगों के विरोध को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की तैयारी थी कि मोहन को रात में ही कब्जे में ले लिया जाए। लेकिन बाद में पता चला कि मोहन हाथी को खेमसरी बाग में बांध दिया गया है जहां तक वाहन पहुंच नहीं सके।
यहां हाथी को बांधकर महावत समेत तीनाें आरोपी भाग निकले। पुलिस घंटों प्रयास के बाद भी उसे बाग से बाहर नहीं ला सकी। बाद में पुलिस को जानकारी हुुई कि महावत वारिश गुलाम के अलावा मोहन किसी की बात नहीं मानता तो पुलिस ने उसकी तलाश करने के साथ ही रात में हाथी को कब्जे में लेने का प्रयास बंद कर दिया। हाथी की सुरक्षा में पुलिस व पीएसी के जवानों को तैनात कर एसपी जिला मुख्यालय लौट गए। रात में प्रभारी कोतवाल अमित कुमार पांडेय ने काफी मशक्कत के बाद महावत को खोज निकाला। गुरुवार की सुबह छह बजते ही पुलिस व पीएसी के साथ वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम खेमसरी पहुंच गई। महावत की मदद से हाथी को लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग पर धुधुआ गाजन के पास लाया गया। जहां पहले से मोहन को ट्रक पर लादने की तैयारी की गई थी। यहां लाने के बाद हाथी को ट्रक पर चढ़ाया जाने लगा, लेकिन वह ट्रक पर चढ़ नहीं रहा था। इस बीच मोहन को वश में करने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने बेहोशी का इंजेक्शन भरना शुरू कर दिया। इस पर वहां मौजूद भीड़ भड़क गई और टीम के सदस्यों की धुनाई कर दी। स्थिति बिगड़ते देख अधिकारियों ने लोगों को समझाया और दो घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर करीब तीन बजे किसी तरह हाथी को ट्रक पर लादकर चिलबिला के जंगल ले जाया गया। अब मोहन का नया आशियाना चिलबिला का जंगल होगा, जहां वन विभाग के कर्मचारी उसकी देखभाल करेंगे। इस बारे में डीएफओ वाईपी शुक्ला का कहना है कि कोर्ट का आदेश है कि हाथी को कब्जे में लेकर प्रतापगढ़ में ही रखा जाए। उसे चिलबिला ले जाकर जंगल में रखा जाएगा। बिना लाइसेंस हाथी रखने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में नामजद महावत को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। प्रभारी कोतवाल अमित पांडेय ने बताया कि अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।