केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के आम और रेल बजट ने लोगों को मामूली राहत दी है। नोटबंदी के बाद आयकर सीमा ढाई से बढ़ाकर चार लाख किए जाने की उम्मीद पाल बैठे लोगों को तगड़ा झटका लगा है। कर्मचारी इस बात से आश्वस्त थे कि बचत का दायरा जहां बढ़ेगा, वहीं आयकर की सीमा बढ़कर चार लाख रुपये हो जाएगी, मगर ऐसा नहीं हो सका। आयकर की सीमा पूर्व में 2.50 लाख थी, जो नए बजट में बढ़कर तीन लाख रुपये हो गई है।
नोटबंदी के बाद महंगाई को रोकने के लिए केंद्र सरकार की विशेष पहल का इंतजार कर रहे जिले के लोगों को झटका लगा है। बुधवार को संसद में पेश रेल और आम बजट में आम नागरिकों को कोई विशेष राहत नहीं मिली है। कर्मचारियों की उम्मीदों पर आम बजट खरा नहीं उतरा। हालांकि सरकार ने थोड़ी राहत अवश्य दी है। आयकर सीमा बढ़ाकर ढाई लाख से तीन करने के साथ ही तीन लाख से पांच लाख रुपये आय वाले कर्मचारियों को पांच प्रतिशत टैक्स देना होगा। जबकि पहले इन्हें दस प्रतिशत टैक्स देना पड़ता था। बजट में गर्भवती महिलाओं के लिए पोषण के लिए छह-छह हजार रुपये, बेघर एक करोड़ लोगों को घर मुहैया कराने और ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर के निवेश पर अधिक जोर देने का बजट संचित करने के साथ ही गरीबी दूर करने का प्रयास किया गया है। इससे जिले के लोगों को भी फायदा हो सकता है। रेल बजट में एक ऑनलाइन टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को अब सर्विस टैक्स नहीं देना होगा। स्टेशनों पर गंदगी को रोकने के लिए वर्ष 2019 तक सभी ट्रेनों में बायो टायलेट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय रक्षा कोष का गठन करने का फैसला लिया है।
गृहणियों के लिए कुछ नहीं, किसानों को मरहम
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के पिटारे से निकले बजट ने कर्मचारियों और गृहणियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। हालांकि रेल किराया नहीं बढने, नया सर्विस चार्ज नहीं लागू होने, डाक्टरों की पढ़ाई के लिए पांचहजार सीटें बढ़ाने और किसानों को सस्ता कर्ज दिलाने, एक करोड़ लोगों को पक्का मकान दिलाने और गांव से गरीबी
दूर करने के संकल्प से जिले के लोगों को थोड़ी आस जरूर बंधी है।