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आठवें दिन पहुंचा शहीद का पार्थिव शरीर

Thu, 02 Feb 2017 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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कश्मीर के गुरेज सेक्टर में शहीद हुए विजय शुक्ला का पार्थिंव शरीर बुधवार की रात बेल्हा पहुंच गया। आठवें दिन पहुंचे शहीद के पार्थिंव शरीर को घर नहीं ले जाया गया बल्कि उसे अफसरों की मौजूदगी में मर्चरी में रखवा दिया गया। गुरुवार की सुबह सेना के वाहन से पाथव शरीर पांडेयतारा ले जाया जाएगा।

बतादें कि कश्मीर के गुरेज सेक्टर में 25 जनवरी को साथियों को बचाने निकले सेना के हवलदार विजय शुक्ला हिमस्खलन में शहीद हो गए थे। कई दिनों से परिवार व गांव के लोग अपने विजय के दीदार को तड़प रहे थे। मंगलवार को शहीद का शव वाराणसी लाया गया लेकिन रात होने के कारण उसे वापस ले जाया गया। जबकि उसे एंबुलेंस से सड़क मार्ग से घर भेजा जा सकता था, लेकिन ऐसा करने के बजाय जिम्मेदार शहीद के शव को लेकर लखनऊ लौट गए। शव को कमांड अस्पताल में रखा गया। जहां बुधवार को सलामी दी गई। सेना के कर्नल तक पुलिस लाइन में हैलीपैड पर इंतजार करते रहे लेकिन बाद में पता चला कि शव वाराणसी भेजा गया है। वहां से देर शाम विजय का शव सेना के जवान एंबुलेंस से लेकर घर के लिए रवाना हुए।
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आठवें दिन देर रात शहीद का शव जिले की मिट्टी पर पहुंचा लेकिन उसे घर नहीं ले जाया गया। सैन्य अधिकारियों ने प्रशासिनक अमले से बात कर शव को रात में अस्पताल की मर्चरी में रखवा दिया। जहां जिले के अधिकारियों के अलावा सेना के जवान मौजूद रहे। गुरुवार की सुबह सात बजे पार्थिंव शरीर को लेकर सैनिक घर के लिए रवाना होंगे। जहां सेना के अधिकारी गार्ड आॅफ आॅनर देंगे। इसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।

लाल का चेहरा देखने को पथरा गईं आंखें
 शहीद विजय शुक्ला का चेहरा देखने के लिए परिवार के लोगों की आंखें पथरा गईं हैं। पत्नी, मां का रो-रोकर बुरा हाल है। रोते हुए वे बेहोश हो जातीं रहीं। आठ दिन से अपने लाल का चेहरा देखने के लिए पिता तड़प रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों को परिवार व रिश्तेदार कोसते नजर आए।

फतनपुर थाना क्षेत्र के पांडेयतारा निवासी तीर्थराज शुक्ला के छोटे बेटे विजयशुक्ला सेना में हवलदार थे। कश्मीर के बांदीपुर के गुरेज सेक्टर में साथियों को बचाने निकले विजय शुक्ला 25 जनवरी को हिमस्खलन की चपेट में आ गए। 44 घंटे बाद विजय का शव मिला। इस बात की खबर  परिजनों को मिली तो वे अपने लाल का चेहरा देखने के लिए तड़प उठे। आठ दिन से हर दिन सभी लोग विजय के पाथव शरीर आने की राह देखते रहे। आठवें दिन भी वाराणसी आकर शव लखनऊ लौट गया। दिन में लोग बातचीत कर पाथव शरीर के पहुंचने की जानकारी लेते रहे। विजय का चेहरा देखने के लिए परिजनों की आंखें पथरा गईं। पत्नी मनोरमा व मां निर्मला देवी का रो-रोकर बुरा हाल रहा। वे बार-बार अचेत हो जातीं रहीं। रिश्तेदार उन्हें संभालने के लिए परेशान रहे। परिजनों को रोता देख बुधवार को बेटी एसिका को भी आभास हो गया था कि उसके पिता उससे बहुत दूर जा चुके हैं। हर कोई मासूम बच्ची को निहारता रहा।

शाम तक पार्थिव शरीर न आने पर ग्रामीणों ने किया हाईवे जाम

कश्मीर के गुरेज सेक्टर में हिमस्खलन के चपेट में आने से शहीद हुए विजय शुक्ला का शव आठवें दिन भी उनके पैतृक गांव नहीं पहुंच सका। लखनऊ से पार्थिव शरीर हेलीकाॅप्टर से वाराणसी ले जाने की खबर मिलते ही ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग पर जाम लगा दिया। जाम की खबर पर पहुंचे एडीएम व एएसपी ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर जाम हटवाया। इसके बाद सैन्य अधिकारियों से बातचीत कर पाथव शरीर घर के लिए निकलने की जानकारी दी।

फतनपुर थाना क्षेत्र के पांडेय तारा गांव के लोग आठ दिन से शहीद विजय शुक्ला के पाथव शरीर पहुंचने की बाट जोह रहे हैं। मंगलवार को ही शहीद विजय का शव आने की उम्मीद थी लेकिन हेलीकाप्टर रात में वाराणसी से लखनऊ चला गया। जहां सेना के कमांड अस्पताल में शहीद का शव रखा गया। बुधवार को दोपहर तक हेलीकाप्टर से शहीद विजय का शव पुलिस लाइन में आने की जानकारी परिवार के लोगों को मिली। कमांड में सैनिकों ने शहीद सैनिक के शव को सलामी दी। दोपहर बाद 2.40 मिनट पर हेलीकाप्टर से शहीद का शव फिर वाराणसी ले जाने की जानकारी परिजनों को हुई तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। वे जिला प्रशासन के साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के रवैये पर आक्रोश जताते हुए नारेबाजी करने लगे। इसके बाद सैकड़ों ग्रामीण वाराणसी- लखनऊ राजमार्ग पर स्थित फतनपुर बाजार पहुंचे।
वे जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शहीद के शव को जल्द से जल्द मंगवाने की मांग करने लगे। हाईवे पर जाम की खबर पर रानीगंज, फतनपुर, पट्टी पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। लोग अधिकारियों को मौके पर बुलाने की जिद करने लगे।
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 कुछ ही देर में अपर जिलाधिकारी सोमदत्त मौर्य, एएसपी पूर्वी स्वामीनाथ समेत भारी भरकम पुलिस व पैरामिलेट्री फोर्स मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत कराया। बताया कि वाराणसी से पाथsव शरीर सडक़ मार्ग से लाया जा रहा है। तब जाकर ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और वे जाम हटाकर शहीद के घर की ओर रवाना हुए। पीछे-पीछे अधिकारी भी शहीद के घर पहुंचे। जहां देर रात तक प्रशासनिक अमला डटा रहा।
 
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