प्रतापगढ़। शहर में आलीशान बंगला, महंगी कार और ठाट-बाट देखने से आप यह अंदाजा नहीं लगा सकते कि इसके मालिक बेसिक स्कूलों के अध्यापक हैं। मगर डायट से संबंद्ध शिक्षकों की यही स्थिति है। डायट के शिक्षकों में तमाम करोड़पतियों की लाइन में हैं।
डायट में करीब दस साल से जमे बेसिक शिक्षा विभाग के कई शिक्षकों की अनुमति के बगैर पत्ता तक नहीं हिलता। वर्ष 2004 और 2008 से सम्बद्ध इन शिक्षकों को वास्तविक रूप में डायट में प्रवक्ता की कमी दूर करने के लिए तैनात किया गया था। चर्चा है कि ये लोग नए अध्यापकों की तैनाती, काउंसलिंग और सत्यापन में लाखों रुपये का खेल कर करोड़पति बन गए हैं। महंगी गाड़ियों से सफर करने वाले इन शिक्षकों की शहर के वीआईपी इलाके में हवेली है। बताया जाता है कि प्रतापगढ़ के साथ ही इन शिक्षकों की लखनऊ और इलाहाबाद में भी प्रापर्टी है। बीएसए एसटी हुसैन ने बताया कि डायट में शिक्षक नहीं हैं।
इसलिए इन शिक्षकों को सम्बद्ध किया गया है। जल्द ही इन शिक्षकों को हटाकर नए शिक्षकों को तैनात किया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने प्राइमरी स्कूलों में तैनात तकरीबन 686 शिक्षकों का 18 नवंबर को प्रमोशन कर दिया। प्रमोशन सूची में डायट के आठ शिक्षक शामिल हैं। सीतापुर गेस्ट हाउस में अनैतिक कार्य में लिप्त रहने के आरोप में निलंबित किया गया एक शिक्षक निलंबन के बाद से फरार हो गया है। सीतापुर से जांच टीम पहुंचने को लेकर शुक्रवार को दिनभर डायट प्रशासन चौकन्ना रहा। जिलाधिकारी ने भी डायट के शिक्षकों की विशेष टीम से जांच कराने की बात कही है।