चार करोड़ डंप, फिर भी आठ महीने से रसोइयों को नहीं दिया मानदेय
जिले में तैनात हैं 7032 रसोइयां, विभाग में डंप हैं चार करोड़ रुपये
जिले में एमडीएम बनाने, बच्चों को खिलाने और बर्तन की सफाई करने की जिम्मेदारी निभाने वाली 7032 रसोइयां को आठ माह से मानदेय नहीं मिला है। ऐसा नहीं है कि विभाग में धनराशि नहीं है, बल्कि चार करोड़ रुपये डंप हैं। मगर आनलाइन भुगतान के नाम पर रसोइयों को परेशान किया जा रहा है।
जिले के कक्षा एक से आठ तक के 3224 स्कूल ऐसे हैं, जहां एमडीएम योजना लागू है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग सवा चार लाख बच्चों को यह रसोइयां प्रतिदिन दोपहर में खाना बनाकर खिलाती हैं। मगर दुर्भाग्य यह है कि स्कूलों में तैनात 7032 रसोइयां को आठ माह से मानदेय नहीं मिला है। दरअसल, अभी तक एमडीएम के खाते में धनराशि जाती थी और हेडमास्टर बैंक से रुपये निकालकर रसोइयां को देते थे। मगर कई मामले ऐसे प्रकाश में आए, जहां मानदेय की रकम भेजने के बाद भी रसोइयां को मानदेय नहीं मिला था। शासन ने चालू शिक्षासत्र में नई पहल करते हुए रसोइयों के खाते में आनलाइन भुगतान करने का निर्णय लिया है। ऐसे में जिलेभर के रसोइयां का खाता नंबर, आईएफएसई कोड एकत्रित करने में विभाग को पसीना आ गया है। आलम यह है कि मानदेय के चार करोड़ विभाग में डंप है। मगर खाता नंबर नहीं मिलने के कारण भुगतान नहीं हो पा रहा है। इधर, रसोइयां हेडमास्टरों से मानदेय मांग रही हैं। मगर हेडमास्टर भी लाचार हैं कि जब विभाग ने मानदेय की रकम नहीं दिया तो वह कहां से दें। फिलहाल मानदेय नहीं मिलने से जिले भर की रसोइयों की परेशानी बढ़ गई हैं।