फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एहतियात: कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए मास्टर ट्रेनर देंगे प्रशिक्षण

विज्ञापन
master trainer will trained doctors for facing challeneges of covid-19 third waive
विज्ञापन
प्रतापगढ़। कोरोना की तीसरी लहर में पीडियाट्रीशियन की कमी आड़े न आए, इसलिए शासन ने दूसरे विभागों के डॉक्टरों को भी बाल रोग विशेषज्ञ के तौर पर तैयार करने का फैसला किया है। इसके लिए सर्जन, फिजिशियन, मेडिसिन, सर्जरी, एनेस्थीसिया आदि विभाग के डॉक्टरों को पीडियाट्रिक कोविड सेंटर में मरीजों के इलाज के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे कि जरूरत पड़ने पर बच्चों का इलाज आसानी से हो सके।
विज्ञापन

कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक बताई जा रही है। सबसे बड़ी समस्या बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है। इसको देखते हुए शासन द्वारा जिले में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अनिल गुप्ता, आरके पांडेय और राजीव को लखनऊ बुलाया गया है। यहां तीनों डॉक्टरों को मास्टर ट्रेनर बनाया जा रहा है। इसके बाद जिले में आकर वह दूसरे विभागों के डॉक्टरों को बतौर बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में तैयार करेंगे। प्रशिक्षण में हिस्सा लेने के लिए सभी प्रतिभागियों को संलग्न गूगल फॉर्म के जरिये पंजीकरण करना है। यह पंजीकरण केवल एक ही बार किया जाएगा। ट्रेनिंग के लिए प्रतिभागी सिर्फ अपने मोबाइल नंबर से ही लॉगइन कर सकेगा। प्रशिक्षण से पहले ट्रेनिंग टीम द्वारा रजिस्ट्रेशन फॉर्म में अंकित मोबाइल नंबर व ई-मेल पर प्रशिक्षण की लिंक शेयर की जाएगी। सभी रजिस्टर्ड प्रतिभागियों के ट्रेनिंग में प्रतिभाग करने पर ई-प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा। मॉस्टर ट्रेनर आरके पांडेय ने बताया कि जिले में तैनात एमबीबीएस चिकित्सकों के साथ अन्य विभाग के डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
35 लाख की आबादी पर महज चार डॉक्टर हैं तैनात
35 लाख की आबादी वाले जनपद में सरकारी अस्पतालों में महज चार बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती हुई है। इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में तीन डॉक्टर हैं। इस तरह जिले में कुल सात बाल रोग विशेषज्ञ ही हैं। इससे कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों की जान पर बड़ा खतरा हो सकता है। इसलिए शासन ने यह कदम उठाया है।
विज्ञापन

27 सीएचसी में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं
जिले में कहने को तो 27 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 56 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन हो रहा है। मगर इनमें से एक भी स्वास्थ्य केंद्र में बाल रोग चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। सभी अस्पतालों का संचालन एमबीबीएस चिकित्सकों के भरोसे हो रहा है। इससे मरीजों को इलाज कराने के लिए भटकना पड़ता है। परेशान मरीज मेडिकल कॉलेज या फिर प्रयागराज अथवा लखनऊ का चक्कर लगाते हैं।
कोरोना की तीसरी लहर पर काबू पाने के लिए पहले से ही तैयारी की जा रही है। जिले में तैनात तीन डॉक्टरों को मॉस्टर ट्रेनर बनाने के लिए लखनऊ भेजा गया है। लौटने के बाद ये जिले के अन्य चिकित्सकों को प्रशिक्षण देंगे। -डॉक्टर सीपी शर्मा, एसीएमओ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें