पति की दीर्घायु के लिए वट सावित्री का निर्जला व्रत रखकर सुहागिन महिलाओं ने सोमवार को वट वृक्ष की पूजा की। बरगद के पेड़ की 12 बार परिक्रमा कर सुहागिनों ने कच्चे सूत की माला बनाकर गले में धारण किया।
16 शृंगार कर सुहागिन महिलाओं ने बांस की डलिया में पूड़ी, गुलगुला, ठोकवा व भींगे चने, कुमकुम रोली व अक्षत, फल, पान सुपारी व धूपबत्ती व जल का लोटा लेकर वट वृक्ष को प्रसाद चढ़ाया। परिवार की सुख समृद्धि के साथ ही व्रती महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की कामना की।
आचार्य ओमप्रकाश पांडेय ने बताया कि हिंदू धर्म की मान्यता के मुताबिक वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। वट वृक्ष दीर्घायु का प्रतीक है। इसलिए महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
शहर के मां बेल्हा देवी मंदिर, जिला पंचायत परिसर, मीराभवन, पूरे ओझा व कटरा रोड स्थित डीएवी इंटर कॉलेज के सामने वट वृक्ष की पूजा करने के लिए महिलाओं की भीड़ जमा रही। पूजा संपन्न होनेे के बाद महिलाओं ने प्रसाद वितरित किया। वहीं, ग्रामीण अंचल में वट सावित्री व्रत को लेकर महिलाओं को खासा उत्साह रहा। गांवों में सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा व पूजा-अर्चना करती नजर आईं।