पृथ्वी पर अत्याचार, अनाचार जब-जब बढ़ता है तो भगवान स्वयं मानव का रूप धारण कर अवतरित होते हैं। धर्म की रक्षा और गरीबों की सेवा से बढक़र कोई दान नहीं है। यह बातें वृंदावन से पधारे अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक डॉ. श्याम सुंदर पाराशर महाराज ने बिबियाकरनपुर गांव में पं. आयोजित कथा के दौरान कहीं।
सनातन धर्म के गौरव की उपाधि से विभूषित डॉ. श्याम सुंदर पाराशर महाराज ने कहा कि गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि कर्म भी करो और मेरा चिंतन भी करो। उन्होंने कहा कि जो बात अपने लिए बुरी लगती है, उसे कभी दूसरों के लिए प्रयोग मत करो, यही सबसे बड़ा धर्म है।
कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होते ही श्रोता झूम उठे। संगीतमय कथा को सुनने के लिए बड़ी संख्या में आसपास को लोगों का जमावड़ा हो रहा है। बुधवार को मुख्य यजमान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव पं. श्यामकिशोर शुक्ल और उनकी पत्नी शैलजा ने पाराशर महराज को माल्यार्पण आशीर्वाद लिया।
इस मौके पर डॉ धर्मेंद्र देव शुक्ल, डॉ प्रशांत देव शुक्ल, श्याम शंकर मिश्र, शिवानी मातनहेलिया, राहुल मिश्रा, रमेश मिश्र, प्रभात त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।