बेपरवाह अफसरों और लापरवाह लाइनमैनों की तानाशाही से जिले की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। बदन झुलसाने वाली इस गर्मी में बगैर बिजली के शहर से लेकर गांव तक लोग तड़प रहे हैं। बमुश्किल शहर को 24 में पांच से छह घंटे ही सप्लाई मिल रही है। बिजली न होने से जलनिगम के पंप भी ठप हैं।
शासन ने रोस्टर जारी किया है कि शहर में मात्र नौ घंटे कटौती और 15 घंटे बिजली की आपूर्ति की जाए। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार 10 घंटे सप्लाई का रोस्टर है। कागज पर चाहे जो हो पर हकीकत यही है कि यह रोस्टर गैरजिम्मेदार अफसरों की वजह से चौपट हो चुका है। शहर की बात ही करें तो 24 में मात्र पांच से छह घंटे ही आपूर्ति हो रही है। शनिवार को शाम छह बजे से बिजली कटी तो रात 11 बजे सप्लाई चालू हुई। शहर के पिंटू सिंह, दीपक शर्मा, मोहित खरे आदि ने बताया कि ठीक एक घंटे बाद 12 बजे फिर आपूर्ति ठप हुई तो तीन बजे के करीब बिजली चालू हुई। आपूर्ति शुरू होते ही तूफान आ गया।
तूफान को देखते हुए बिजली फिर गुल हो गई तो सुबह सात बजे तक नहीं आई। सात बजे सुबह सप्लाई मिली तो दस नौ बजे फिर कट गई। दोपहर 12 बजे के करीब सप्लाई चालू हुई और एक बजे फिर बिजली चली गई। फिर 4.10 बजे आपूर्ति चालू हुई। इस 24 घंटे के बीच जो बिजली मिली थी उसमें पच्चीसों बार से ज्यादा ट्रिपिंग होती रही। जबकि विभाग का दावा है कि 12 से 13 घंटे सप्लाई शहर को दी जा रही है। लालगंज, पट्टी, मानधाता, सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही हाल है।
इसके अलावा इमरजेंसी के नाम भी जबरदस्त कटौती जारी है। विभागीय अफसरों व लाइनमैनों के जेहन में न तो शीर्ष अफसराें का खौफ है और न ही लोगों के उग्र होने की फिक्र। नियम व रोस्टर को ताक पर रखकर वह आपूर्ति व्यवस्था व सारा काम अपने हिसाब से कर रहे हैं। बिजली के अभाव में कूलर, पंखे बेकार साबित हो रहे हैं। बदन झुलसाने वाली गर्मी में लोग बिन बिजली के पानी के संकट से भी जूझ रहे हैं। इसकी न तो विभाग को लोगों की चिंता है और न ही जिले के शीर्ष अफसरों को।