पुरी पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने युवाओं से कहा कि जीवन जीविका के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि जीविका जीने के लिए होना चाहिए। पीठाधीश्वर ने कहा कि जीवन परमात्मा की प्राप्ति के लिए समर्पित होना चाहिए।
नगर के सरस्वती विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में लालगंज प्रवास के तीसरे दिन शुक्रवार को पुरी पीठाधीश्वर निश्चलानंद ने छात्र और छात्राओं से प्रश्रोत्तरी एवं संवाद कार्यक्रम किया। उन्होंने छात्रों से प्रश्रोत्तरी के दौरान कहा कि वैदिक रीति से परमात्मा के द्वारा सृष्टि का सृजन हुआ है। उन्होंने बताया कि जीवन कर्म की सुचिता से सफल हुआ करता है।
महाविद्यालय के प्रबंधक एवं पूर्व मंत्री प्रो. शिवाकांत ओझा ने जगदगुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महराज का अभिनंदन किया। प्राचार्य डॉ. अमित सिंह के संयोजन में छात्र छात्राओं व शिक्षकों द्वारा जगदगुरु पर पुष्पवर्षा की गई। डॉ. माधुरी ओझा, उपप्रबंधक इंजीनियर पूर्णांशु ओझा, सत्यांशु ओझा, देवांशु ओझा ने पादुका पूजन किया। इस मौके पर निदेशक डॉ. संदीप मिश्र, डॉ. अंबिकेश त्रिपाठी, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, डॉ. आशुतोष शुक्ल, आचार्य रामअवधेश मिश्र, गुरुवचन सिंह, ब्रजघोष ओझा, केशवराम ओझा, आचार्य उमाशंकर मिश्र, राजेश सिंह आदि मौजूद रहे।
वहीं श्रीरामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कराए जाने की मुहिम को लेकर पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद को अभियान समिति ने ज्ञापन सौंपा। समिति के संयोजक ज्ञान प्रकाश शुक्ल की अगुवाई में पदाधिकारियों ने संकल्प प्रस्ताव प्रदान किया। इस मौके पर डॉ. ज्ञानेंद्रनाथ त्रिपाठी, राजेशचंद्र तिवारी, संदीप मिश्र, शिव नारायण शुक्ल, शक्तिधरनाथ पांडेय मौजूद रहे।