जिले में एक एनजीओ द्वारा शिक्षित महिलाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये का चूना लगाने का खुलासा हुआ है। संस्था ने फर्जी तरीके से कस्तूरबा और मिडिल स्कूलों में बालिकाओं को सिलाई, कढ़ाई सिखाने के लिए शिक्षिका और निरीक्षिका के पद पर महिलाओं की नियुक्ति कर दी। महिलाएं जब स्कूल में कार्यभार ग्रहण करने पहुंचीं तब ठगी के खेल का खुलासा हुआ।
बेसिक शिक्षा विभाग के कस्तूरबा और मिडिल स्कूलों में बालिकाओं को सिलाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण देने के नाम पर एक एनजीओ ने शिक्षिका और निरीक्षिका के पद पर फर्जी तैनाती कर दी। एनजीओ संचालक ने अपनी संस्था को बीएसए कार्यालय से संबद्ध बताकर मोटी रकम वसूल कर नियुक्ति पत्र जारी कर दिए। जिले की लगभग 550 महिलाओं को दस-दस हजार रुपये मानदेय पर तैनात करके एक माह का भुगतान भी कर दिया। एनजीओ और विभागीय अफसरों की मिलीभगत के इस खेल का खुलासा उस समय हुआ, जब महिलाएं स्कूलों में ज्वाइन करने पहुंच र्गइं।
अध्यापकों ने जब विभागीय अधिकारियों से संपर्क साधा तो पता चला कि यह सब फर्जी है। हालांकि ठगी गईं महिलाओं को एनजीओकर्मी अभी भी दिलासा दे रहे हैं कि तीन माह के बाद उनकी नौकरी पक्की हो जाएगी। विभागीय जानकारों की मानें तो पहले पांच स्कूलों में तैनाती की गई, फिर उसके बाद जिले के अधिकांश स्कूलों में तैनाती का खेल प्रारंभ हुआ। मामले का खुलासा होने पर संचालक की ओर से महिलाओं को धमकी दी जा रही है कि अगर किसी से शिकायत की तो नौकरी हाथ से निकल जाएगी। इस भय से कोई भी पीड़ित सामने आने को तैयार नहीं है।
कहा, तीन माह की ट्रेनिंग के बाद पक्की होगी नौकरी
शिक्षिका और निरीक्षिका पद के लिए जारी किए नियुक्ति पत्र में तीन माह प्रशिक्षण की अवधि और उसके बाद स्थायी चयन का दावा किया गया है। जिले के कुंडा इलाके केे निवासी एनजीओ संचालक ने लखनऊ में अपना कार्यालय खोल रखा है।
पचास हजार से एक लाख तक की हुई है वसूली
शिक्षिका और निरीक्षिका के पद पर फर्जी तैनाती के लिए पचास हजार से एक लाख रुपये तक वसूली हुई है। बेरोजगार महिलाओं ने किसी तरह रुपये की व्यवस्था कर एनजीओ को दिया, लेकिन फर्जीवाड़े की जानकारी होने पर उनकी आंखों से आंसू निकल गए।