कुंभ मेले को देखते हुए प्रतापगढ़ डिपो की खटारा बसों को मेला स्पेशल बना दिया गया है। जबकि 70 में 15 बसें ऐसी हैं जो धक्का लगाने पर ही स्टार्ट होती हैं। बीच रास्ते में कहां धोखा दे दें, यह चालक-परिचालक भी नहीं जानते। वहीं कुछ बसों में सीट गायब है तो कुछ में तारों का मकड़जाल है। इससे शानी स्नान पर कुंभ जाने वाले यात्रियों को मुसीबत झेलनी पड़ सकती है।
प्रतापगढ़ डिपो में निगम की 70 और 13 अनुबंधित बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें से 15 बसें नई हैं, बाकी पुरानी। कुछ तो खटारा हो गई हैं तो कुछ धक्का देने के बाद स्टार्ट होती हैं। बीच रास्ते में कहीं भी धोखा दे सकती हैं। अब तक 15 बसें प्रतापगढ़ डिपो में रहती थीं।
शासन ने परिवहन विभाग को मेला स्पेशल बसों के संचालन के लिए आदेश दिया तो निगम के अफसर परेशान हो गए। एआरएम ने खटारा बसों को काम चलाऊ बनाकर उन्हें मेला स्पेशल बना दिया। खटारा बसों पर मेला स्पेशल तो लिखा है, मगर वह डिपो से बाहर मेन रोड तक नहीं जाती है। इसके बाद भी मेला स्पेशल बस में इनकी गिनती की जा रही है। कुछ बसों में यात्रियों के बैठने के लिए लगी सीटें उखड़ गई हैं।
कहां से चलेंगी कितनी बसें
ढकवा से झूंसी के लिए 14 स्पेशल बसें
ढकवा से चलकर प्रतापगढ़ के रास्ते फाफामाऊ के लिए 30 बसें
पट्टी से झूंसी के लिए 19 स्पेशल बसें
प्रतापगढ़ से सिविल लाइंस के लिए 20 बसें
लालगंज से प्रतापगढ़ होकर सिविल लाइंस तक 20 बसें
खटारा बसों की मरम्मत कराई जा रही है। ऐसी एक भी बस नहीं है जो बीच रास्ते में धोखा दे दे। हालांकि जिन बसों में सीट नहीं है, उसकी व्यवस्था कराई जा रही है। प्रतापगढ़, लालगंज और पट्टी से संचालित हो रही सभी बसों को मिला कर कुंभ मेला स्पेशल बनाया गया है।
महेशचंद्र श्रीवास्तव, एआरएम, प्रतापगढ़।