प्रशिक्षित बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए ऋण मुहैया कराने के नाम पर खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग में अभ्यर्थियों को ठगा जा रहा है। लक्ष्य से अधिक अभ्यर्थियों का चयन करके फाइल तैयार करने के नाम पर दस-दस हजार रुपये ऐंठे जा रहे हैं। इधर बैंक फाइल पहुंचने के बाद अभ्यर्थियों को ऋण नहीं दे रहे हैं।
जिले में शिक्षित बेरोजगारों के लिए मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग योजना के तहत सामान्य पुरुष को चार प्रतिशत ब्याज और सामान्य महिला, पिछड़ी जाति पुुरुष, महिला, अनुसूचितजाति, जनजाति के अभ्यर्थियों को दस लाख रुपये तक बगैर ब्याज का ऋण मुहैया जाता है। इसी विभाग में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत सामान्य पुरुष को 25 प्रतिशत सब्सिडी, सामान्य महिला, पिछड़ीजाति पुरुष और महिला, एससीएसटी महिला -पुरुष को 35 प्रतिशत सब्सिडी पर अधिकतम तीस लाख रुपये तक का ऋण मुहैया कराया जाता है। वर्ष 2016-17 में विभाग में इस योजना के तहत 36 लाभार्थियों का चयन किया गया है, जबकि लक्ष्य मात्र 17 लाभार्थियों का था। वर्ष 2017-18 में विभाग ने 106 का लक्ष्य दिया है, जबकि 217 लाभार्थियों का चयन किया गया है। लक्ष्य से अधिक चयन करने में विभागीय कर्मचारी खेल करते हैं। दरअसल में वह प्रत्येक लाभार्थियों से फाइल तैयार करने और अफसरों की संस्तुति देने के एवज में दस-दस हजार रुपये एेंठ लेते हैं। फाइल तैयार होने के बाद विभाग संबंधित बैंक को फाइल भेज देता है। लाभार्थियों को बैंक से ऋण मिले या न मिले, मगर वह अपना काम कर लेते हैं। ऐेसे में प्रतिवर्ष दर्जनों ऐेसे लाभार्थी होते हैं, जिन्हें ऋण तो नहीं मिलता, मगर फाइल बनाने के नाम पर उनसे रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।