जिले में दुग्ध उत्पादन कर आय का स्रोत बढ़ाने का सपना देखने वाले लोगों की उम्मीदों पर बैंकों ने पानी फेर दिया है। जिले से तैयार होकर बैंक पहुंचने वाली 18 फाइलों को शाखा प्रबंधकों ने वापस कर ऋण देने से साफ मना कर दिया है। इससे लाभार्थी और विभागीय अफसरों के होश उड़ गए हैं। जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए माइक्रो कामधेनु योजना प्रारंभ की गई है। शासन ने जिले के 45 लाभार्थियों का चयन करने का लक्ष्य रखा था। लक्ष्य के सापेक्ष 45 लाभार्थियों की पत्रावली तैयार कर जिले के विभिन्न स्थानीय बैंकों को फाइल भेजी गई। शाखा प्रबंधक तीन माह तक लाभार्थियों को आज-कल ऋण जारी करने की बात कहकर दौड़ाते रहे।
इस बीच कई शाखा प्रबंधकों का तबादला भी हो गया। मई माह में अफसरों के कड़े रुख अख्तियार करने पर बैंकों ने फाइल वापस कर ऋण देने से हाथ खड़े कर दिए। पशुपालन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो विभिन्न बैंकों से 18 फाइलें वापस आ गई हैं, जबकि 15 लाभार्थियों का ऋण स्वीकृत तो कर दिया गया है, मगर अभी भुगतान नहीं किया गया है। चयनित लाभार्थियों का आलम यह है कि वह पांच माह से विकास भवन और बैंक का चक्कर लगाने में लगभग हजारों रुपये फाइल तैयार करने, तो इससे अधिक धनराशि आने-जाने में खर्च कर चुके हैं। मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा. वीपी सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से फाइल तैयार कर बैंकों को भेज दी गई, मगर बैंकवाले ऋण नहीं स्वीकृत कर रहे हैं। इससे लाभार्थियों में निराशा है। उन्होंने बताया कि सभी चयनित लोगों को ऋण दिलाने के लिए डीएम से वार्ता हुई है।