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किसी का एक, किसी का पांच रुपये माफ

Tue, 12 Sep 2017 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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2000 rupees
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कर्जमाफी के नाम पर जिले के किसानों के साथ जिला प्रशासन के अफसरों और बैंककर्मियों ने गजब का मजाक किया है। पहले चरण में सत्यापन के बाद ऋणमाफी के लिए चयनित किए गए 14,892 किसानों में कई किसान ऐसे भी हैं जिन्हें प्रशासन ने झुनझुना थमा दिया है। उनका एक से पांच रुपये तक का कर्ज माफ किया गया है। वहीं बहुतेरे ऐसे भी है जिनका 10 से 78 रुपये तक का कर्जा माफ कर वाहवाही लूटी जा रही है। इनमें से अधिकांश किसानों को प्रमाणपत्र भी वितरित कर दिया गया है। जबकि कई किसान इसकी जानकारी होने के बाद प्रमाण पत्र लेने ही नहीं आए। इन किसानों का जितना कर्जा माफ नहीं हुआ है, उससे अधिक बैंक और विभाग का चक्कर लगाने में खर्च हो गया।
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भाजपा सरकार ने किसानों की कर्जमाफी को अपने चुनावी एंजेडे में शामिल किया था। सरकार का गठन होने के बाद किसानों की कर्जमाफी की प्रक्रिया शुरू हुई। सत्यापन के बाद पहले चरण में जिले के 14,892 किसानों को ऋणमोचन योजना में शामिल किया गया। बीते आठ सितंबर को जिले की प्रभारी मंत्री स्वाती सिंह की अगुवाई में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन कर किसानों को कर्जमाफी का प्रमाण पत्र वितरित किया गया। इन दिनों तहसीलों में प्रमाण पत्र बांटने का काम चल रहा है। मंगलवार को रानीगंज तहसील में कार्यक्रम का आयोजन करके किसानों को ऋणमाफी का प्रमाणपत्र वितरित किया गया। इसमें ऐसे भी किसान हैं जिनको सिर्फ एक-एक रुपये माफ करने का प्रमाणपत्र वितरित किया जा रहा है। पहले चरण में जिन 14,892 किसानों को कर्जमाफी का प्रमाणपत्र वितरित किया गया है, उनमें लगभग दो दर्जन से अधिक किसान ऐसे हैैं, जिनका 150 रुपये से कम कर्जमाफ किया गया है। इन किसानों को बाकायदा कार्यक्रम में बुलाकर प्रमाणपत्र वितरित करके वाहवाही लूटी गई। किसानों की मानें तो इसके लिए बैंककर्मी जिम्मेदार हैं। वास्तविकता यह है कि इन किसानों में अधिकांश ऐसे हैं, जिन्होंने खाता बंद करके नया फसली ऋण लिया था, मगर बैंक कर्मियों ने पुराने खाता में बकाया एक रुपये माफी का विवरण भेज दिया, मगर नए खाते का बकाया माफी के लिए नहीं भेजा। इससे यह किसान अपने को ठगे महसूस कर रहे हैं। जिले की अधिकांश बैंक शाखाओं में इस तरह के खेल हुए हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

इस वर्ष कर्जमाफी में बैंक कर्मियों को अहमियत नहीं दी गई है। इससे नाराज बैंककर्मी किसानों को नुकसान पहुंचाने से बाज नहीं आ रहे हैं। वास्तविक लाभ देने के बजाय उन्हें नाममात्र का लाभ दिया जा रहा है। वह किसानों को उलझाने का प्रयास कर रहे हैं। किसानों को कर्ज माफ करने के लिए तैयार होने वाली सूची को अंतिम रूप देने में बैंक अफसरों किनारे कर दिया। राजस्व विभाग और जिला प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे बैंक के अधिकारी ऋणमाफी में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। हालांकि अधिकारियों के निर्देश पर वह कार्यक्रमों में वह मौजूद रहते हैं।
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