जिला अस्पताल में मरीजो को प्लास्टर बांधते अप्रशिक्षित लोग।
जिला महिला अस्पताल में दलालों का बोलबाला है। प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं का दलालों के चलते बुरा हाल हो गया है। दलाल अपने झांसे में लेकर सस्ता और बढ़िया इलाज कराने का दावा करके उन्हें प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंच जाती हैं। इस खेल में चिकित्सक भी शामिल हैं। मरीजों को वह जांच के लिए प्राइवेट पैथालॉजी सेंटरों पर भेजती हैं। इसके बदले में उन्हें कमीशन मिल जाता है। उधर, जिला अस्पताल में चिकित्सकों के बगल बैठने वाले एमआर खुलेआम मरीजों को लूट रहे हैं। चिकित्सक सरकारी दवा लिखते हैं तो एमआर सभी मरीजों को अपनी कंपनी का दवा लिख रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल खुलते ही दलाल पहुंच जाती हैं। कुछ दलाल पोर्टिको में तो कुछ इमरजेंसी कक्ष के पास बैठ जाती हैं। ओपीडी में चिकित्सक के बैठते ही मरीजों की भीड़ जमा हो जाती है। दलाल ही मरीजों को लाइन से खड़ी करवा देती हैं। इसके बाद मरीजों को सेटकर उनसे कुछ पैसा लेकर सीधे चिकित्सक के पास पहुंच जाती हैं। बाहर लाइन में लगी महिलाएं परेशान रहती हैं। चिकित्सक मरीजों के पर्चे पर जांच लिखती हैं तो दलाल उसे लेकर प्राइवेट पैथालाजी सेंटर पर पहुंच जाती है। यहां पर उनका कमीशन सेट होता है। उधर, इमरजेंसी से प्रसव पीड़िता को चिकित्सक कभी ब्लड की कमी तो कभी चिकित्सकों का अभाव बताकर रेफर कर देती हैं। दलाल मरीजों को बरगलाकर उसे लेकर प्राइवेट नर्सिंगहोम पहुंच जाती हैं। यहां चिकित्सक जमकर धनउगाही करते हैं। मरीजों के बगल होने के बाद दलाल को दस प्रतिशत कमीशन देते हैं। यहीं हाल जिला अस्पताल का है। यहां तो कई चिकित्सकों के वार्ड में बैठने वाले एमआर अपनी कंपनी की दवा लिखते हैं। इससे मरीज परेशान हो जाते हैं। एमआर द्वारा लिखी गई और बिकी हुई दवा का शाम को हिसाब होता है।