प्रतापगढ़। जिले के प्रवासी मजदूरों की उम्मीदों पर जेसीबी संचालक पलीता लगा रहे हैं। शासन की रोक के बावजूद शहर से गांव तक जेसीबी गरज रही है। दस मजदूरों का काम एक जेसीबी के करने से प्रवासी मजदूरों को काम करने का मौका नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि मनरेगा में समतलीकरण के साथ ही संपर्क मार्गों का निर्माण भी जेसीबी से ही हो रहा है।
जिले में पुलिस और खनन विभाग की मिलीभगत से शहर से गांव तक जेसीबी गरज रही है। जबकि शासन ने 30 मार्च को पत्र जारी करके लॉकडाउन के दौरान आने वाले प्रवासी मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए जेसीबी के संचालन पर रोक लगा दिया है। मगर, पुलिस वाले अपनी जेब भर रहे हैं, तो खनन विभाग के कर्मचारी सेटिंग से काम चला रहे हैं।
आलम यह है कि मनरेगा के तहत समतलीकरण और संपर्क मार्गों के निर्माण कार्य भी जेसीबी से ही हो रहा है। संडवा चंद्रिका विकास खंड के दांदूपुर दौलत गांव में बीते सप्ताह जेसीबी से समतलीकरण का मामला आने पर अफसर जांच करने पहुंच गए। ग्रामीण इलाकों में निजी कार्य के लिए भी जेसीबी का खूब प्रयोग किया जा रहा है। यही वजह है कि मजदूरों को ग्रामीण को काम नहीं मिल रहा है और वह पलायन को मजबूर हैं। जिले भर के थानों में जेसीबी चलने के पहले हल्का का दरोगा से सौदेबाजी की जाती है, जबकि खनन विभाग ने पहले ही जेसीबी संचालकों से सेटिंग कर रखी है।
जेसीबी से खुदाई पर रोक लगी हुई है। अगर कोई जेसीबी से बगैर अनुमति लिए खुदाई करता है, तो गलत है। ऐसी शिकायती मिलने पर जेसीबी संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
शत्रोहन वैश्य, एडीएम