प्रतापगढ़। कोरोना की रिपोर्ट नेगेटिव होने के बाद भी लोगों की सांस फूल रही है। चिकित्सकों के मुताबिक ऑक्सीजन लेवल कम होने के साथ फेफड़ों में संक्रमण बना होने के कारण यह समस्या आ रही है। ऐसे मरीजों को सावधानी बरतने की जरूरत है, अन्यथा उन्हें दूसरी बीमारी अपनी गिरफ्त में ले सकती है।
जिले में एंटीजन रैपिड किट के साथ ट्रूनॉट और आरटीपीसीआर से जांच लगातार हो रही है। बिना लक्षण वाले मरीजों को कोविड-19 अस्पताल संत एंथोनी में भर्ती कराया जा रहा है। अस्पताल से उपचार कराकर घर लौट रहे मरीजों को कई तरह की दिक्कत आ रही है। ज्यादातर मरीजों को सांस फूलने की दिक्कत हो रही है। उनके फेफड़ों में संक्रमण के चलते यह समस्या बनी हुई है। शहर के अष्टभुजा नगर में रहने वाले 45 वर्षीय युवक 15 दिन पहले संक्रमित हुआ था। होम आइसोलेशन के बाद वह निगेटिव हो गया, लेकिन अब भी उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
डॉक्टरों से राय लेने पर पता चला कि उसके फेफड़ों में कमजोरी आ गई है। अब वह डॉक्टर के परामर्श पर दवाएं खा रहा है। शहर के पलटन बाजार निवासी 65 साल की बुजुर्ग महिला 10 अगस्त को संक्रमित हुई थीं। उन्हें संत एंथोनी में भर्ती कराया गया था। 10 दिन उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी छुट्टी कर दी। उनका कहना है कि कोरोना होने से पहले वह बराबर काम कर लेती थीं। अब तो वह घूम फिर भी नहीं पा रही हैं । सांस फूलने लगती है।
मरीजों को ऐसे आती है समस्या
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ अनूप चौरसिया ने बताया कि फेफड़े में संक्रमण होने पर एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम 4 सप्ताह, ऑर्गेनाइजिंग निमोनिया 6 सप्ताह तक रहता है। फेफड़ों में हवा की बहुत छोटी थैलियां होती हैं जो सांस लेने में ली गई ऑक्सीजन को ग्रहण करती हैं। वायरस के चलते वायु कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।