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अस्पतालों में आग लगी तो जाएगी मरीजों की जान

Sun, 16 Jul 2017 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ - फोटो : pratapgarah
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जिले में अस्पतालों में भी मरीजोें और उनके तीमारदारों की अनदेखी की जा रही है। सरकारी व प्राइवेट अस्पताल में आग की घटनाओं से बचाव के लिए इंतजाम नहीं हैं। हर कदम पर लापरवाही बरती जा रही है। यदि अस्पतालों में आग लगी तो कई लोगों की जान जा सकती हैं।
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लखनऊ के केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में लगी आग से छह मरीजों की जान चली गई। कई जीवन-मौत से संघर्ष कर रहे हैं। अगर इस तरह के हादसे जिले के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में होते हैं तो यहां भी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। यहां तो पर्याप्त दमकल भी नहीं हैं। इमरजेंसी, मेडिकल, चिल्ड्रेन वार्ड और अन्य किसी भी वार्ड में फायर किट नहीं है। न ही आग से बचाव के दूसरे कोई तरीके हैं। जबकि मेडिकल और चिल्ड्रेन वार्ड के साथ कुपोषण पुनर्वास केंद्र दूसरे तल पर हैं। मेडिकल वार्ड जाने के लिए सीढ़ी पर कदम रखते ही विद्युत पॉवर सप्लाई स्विच लगाया गया है।

कभी शार्ट-सर्किट से कोई हादसा हो गया तो मेडिकल और चिल्ड्रेन वार्ड के साथ सर्जिकल वार्ड पुरुष में भर्ती मरीजों को भागने के लिए कोई रास्ता नहीं मिलेगा। आग पर काबू पाने के लिए फायर किट भी नहीं मिलेगा। ब्लड बैंक के मेनगेट के साथ ही सर्जिकल वार्ड में शार्ट सर्किट से कई घटनाएं भी हुई हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार चुप्पी साधे बैठे हैं। दो चार अस्पतालों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर में अंदर जाने और निकलने के लिए एक ही रास्ता है। कुछ अस्पताल दो तल तो कुछ तीन तल के हैं। इन अस्पतालों में भी फायर किट नहीं है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालक को अस्पताल चलाने की अनुमति दे दी गई है। फायर विभाग कभी भी फायरकिट की जांच करने के लिए नहीं कहता है। जिला महिला अस्पताल का ओटी और दो वार्ड दूसरे तल पर हैं। तीसरे तल पर एसएसएनसीयू वार्ड है। दूसरे तल पर जाने के लिए बनी सीढ़ी के नीचे ही पॉवर सप्लाई स्विच सेट किया गया है। लापरवाही किसी भी दिन लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
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