सिंचाई विभाग में फर्जी ढंग से नौ सींच पर्यवेक्षकों की नियुक्ति का मामला गंभीर रूप लेतादजा रहा है। मामले की जांच कर रही विजिलेंस के अफसरों ने बुधवार को कार्यालय पहुंचकर अभिलेखों की जांच-पड़ताल करने के साथ ही संबंधित कर्मचारियों से लगभग पांच घंटे पूछताछ की। विजिलेंस के अफसरों की मानें तो फर्जी नियुक्ति को अंजाम देने में सहयोग करने वाले कर्मियों पर गाज गिरनी लगभग तय माना जा रहा है।
सिंचाई विभाग में वर्ष 2011 में नौ सींच पर्यवेक्षकों का मामले का उस समय खुलासा हुआ था, जब फर्जी ढंग से नियुक्ति कर्मचारियों ने एक माह का वेतन प्राप्त कर लिया था। विभाग में ही तैनात कर्मचारियों ने तत्कालीन अधिशासी अभियंता कोमल त्रिपाठी के काले कारनामे का खुलासा करते हुए सप्ताह भर धरना-प्रदर्शन किया था। डीएम के पहल पर शासन तक मामला पहुंचते ही अधिशासी अभियंता को निलंबित कर मामले की जांच विजिलेंस को सौंप दी गई थी।
बुधवार को सिचंाई विभाग पहुंचे दो सदस्यीय टीम ने नियुक्ति के समय कार्यरत कर्मचारियों का बयान दर्ज करने के साथ ही कागजी अभिलेख भी एकत्र किया। अधिशासी अभियंता संजय त्रिपाठी ने बताया कि विजलेंस टीम के सदस्य लगभग पांच घंटे तक कार्यालय में रहकर गहन पूछतांछ की। जांच दल के सदस्यों की बातों पर यकीन किया जाय, तो फर्जी नियुक्ति में सहयोग करने वाले कर्मचारियों पर भी गाज गिरनी तय है।