जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी टाटा मोटर्स प्राइनेंस कंपनी लिमिटेड पूरे पितई को जब्त वाहन की क्षतिपूर्ति के रूप में 2.50 लाख रुपये देने का आदेश दिया। साथ ही वादी मुकदमे को वाद व्यय के रूप में 10 हजार एवं मानसिक उत्पीड़न के रूप में 20 हजार रुपये देने का आदेश दिया। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश की तिथि के एक माह के भीतर नौ फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ धनराशि देने का आदेश दिया।
रानीगंज तहसील के लच्छीपुर निवासी संदीप कुमार मिश्र ने आयोग के समक्ष वाद दायर किया था। उन्होंने वाद में बताया कि एक डाला मैजिक खरीदने के लिए टाटा मोटर्स फाइनेंस कंपनी पूरे पितई से 3.63 लाख रुपये वित्तीय सहायता प्राप्त की थी। किस्त के तौर पर उन्हें हर महीने 12450 रुपये का भुगतान करना था।
फाइनेंस कंपनी ने पत्रावली के लिए पांच हजार, रजिस्ट्रेशन के लिए 30 हजार रुपये फाइनेंस के समय जमा कराया और वाहन दे दिया। बीमा कंपनी 15 हजार रुपये लेकर पासबुक में केेवल 12450 रुपये ही दर्ज करती थी।
30 किस्त के तौर पर उन्होंने 5.40 लाख रुपये जमा कराया। लेकिन पासबुक में केवल 4.45 लाख रुपये ही दर्ज किए गए। शेष रुपये की रसीद भी नहीं दी गई। जब बीमा कंपनी से वाहन का बीमा कागज और जमा किए गए टैक्स का कागज मांगा तो उन्होंने दो दिन में सभी कागजात देने की बात कही।
10 मई 2017 को वाहन लेकर वादी बीमा कंपनी के कार्यालय गया तो वहां पर जबरन वाहन को खड़ा कर लिया गया। बार-बार कहने पर भी वाहन नहीं छोड़ा गया। साथ ही बीमा कंपनी के कर्मियों ने घर आकर 1.65 लाख रुपये बकाया जमा करने की धमकी दी।
17 अप्रैल 2016 को दुर्घटना हाेने पर वाहन क्षतिग्रस्त होने के बाद भी बीमा कंपनी ने क्षतिपूर्ति दिलाने के नाम पर पांच हजार रुपये लिए थे लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया।
बीमा कंपनी के धोखा देने पर वादी संदीप ने आयोग में वाद दायर कर क्षतिपूर्ति की मांग की थी। जिस पर आयोग अध्यक्ष यशवंत कुमार मिश्र, सदस्य सहसराम पांडेय व महिला सदस्य ममता गुप्ता ने बीमा कंपनी को 2.50 लाख रुपये क्षतिपूर्ति नौ फीसदी वार्षिक ब्याज समेत देने का आदेश दिया।